स्टेटस की तस्वीरें
बहुत कुछ बोलती हैं स्टेटस की तस्वीरें,
नहीं है जुबान उनकी खेंच देती लकीरें।
वो अनजाने ही खूब खोल देती है पोल,
बिना आवाज के ही बजा देती है ढोल।
कौन हैं अपना और कौन हैं यहाँ पराया,
तस्वीरों में देखकर ही ‘नजरों’ में धराया।
आज अभी तक था ‘दिल’ में ही समाया,
सोचता हूँ मैंने क्यों! बेवजह प्रेम बहाया।
क्यों? ऐसे रिश्तों के लिए ‘शिश’ नवाया,
आखिर में अपना लहू बेगाना कहलाया।
पता नहीं कहाँ से कौन ‘खंजर’ ले आया,
ये प्यार का समुंदर सुखी नदी में नहाया।
— संजय एम तराणेकर
