धूर्त शंकराचार्य, तुम्हारी ऐसी तैसी
ढोंगी, खल, नादान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
सनातनी अपमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
तुमको सुनकर खुद भोले शंकर विचलित हैं
फ्रॉड, अघी, बेइमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
करपात्री की भूमि कलंकित किया कमीने
आदर के अवसान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
धूर्त, धतूरे, धोखेबाज, धरम के दुश्मन
तट से कर प्रस्थान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
कायर, कामी, क्रूर, कुलच्छन, हिन्दू द्रोही
कौरव की संतान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
अनशन किस गलती के कारण करता है तू
बनकर सकल सुजान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बना शंकराचार्य स्वयंभू ढोंगी-दंभी
कर तू मुक्त जहान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
चौराहे पर लतियाया जिसने काशी में
अब उसका गुणगान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
अनशन से क्या लाभ सनातन को अब होगा?
हे टीपू के श्वान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
ना तू उमा, न शंकर-सा व्यक्तित्व तुम्हारा
ले ले थोड़ा ज्ञान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
हे पांड़े कुल के कलंक, कलुषित खल कौवे
बेल्हा के अपमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
कांग्रेस के बोल, सपाई जैसी भाषा
म्लेच्छों के वरदान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
कुंभ सकल यूपी-भारत का भी गौरव है
महिमा तो पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
अंबानी सुत की शादी में शामिल होके
बता दिया पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
बाला साहेब सुत के घर हाजिरी लगाके
ढूंढ़ रहा भगवान? तुम्हारी ऐसी-तैसी
है विरक्त तो राजनीति में अंगुली क्यों की?
कर प्रभु का गुणगान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
छात्र संघ के नेता, भूत उतार कुटिल अब
कुंभ शक्ति पहचान, तुम्हारी ऐसी तैसी
कभी ठाकरे, टीपू, कभी अंबानी का भी
करता गौरव गान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
गुरु का सर्टिफिकेट चुराकर पद का लोलुप
बनने चला महान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
महाकुंभ में कोटि-कोटि श्रद्धालु ठहरे
ढूंढ़ रहे उन्वान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
जग में सत्य सनातन जिसने लहराया है
दे उनको सम्मान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
खुद दिन-रात बिताया तट पर जाग-जागकर
उसका यूं अपमान? तुम्हारी ऐसी-तैसी
धर्मवीर है, कर्मवीर है वह यूपी का
तिस पर कुटिल बयान! तुम्हारी ऐसी-तैसी
होता है तू कौन सजा को देने वाला?
बनकर खुद भगवान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
फ्रॉड शंकराचार्य, विपक्षी तोता है तू
बोला हिंदुस्तान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
गुरु का पुण्य लिये खोपड़ी पर, मंडराता
अपनी क्या पहचान? तुम्हारी ऐसी-तैसी
जिस दिन योगी बाबा जी की सटक गई तो
होगा सकल निदान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
कवि सुरेश से पंगा तो ही मत लेना तू,
हे चीनी सामान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
तुझको टीपू-पप्पू जैसे लोग सुहाते
कर उनका ‘लघु’ पान! तुम्हारी ऐसी-तैसी
इंतजार में है बेल्हा, दिखला जा मुंह तू
करना है सम्मान! तुम्हारी ऐसी-तैसी
बुलडोजर वाले बाबा हैं बिजी अभी तो
मानो प्रभु एहसान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
तुझे कुंभ के बाद सबक सिखाएंगे वो
हे ढोंगी शैतान, तुम्हारी ऐसी-तैसी
— सुरेश मिश्र
