बसंत पंचमी
आई बसंत पंचमी प्यारी-प्यारी
खुशियों की चादर पीली-पीली।
ठिठुरन भागी , धूप मुस्काई,
धरती लगी आज बड़ी रंगीली।।
सरसों हँसी खेतों-खलिहानों में,
कोयल बोली मीठा-सुरीला गान।
सभी फूलों ने खोलीं रंगीन आँखें,
महका सारा हिंदुस्तान जहान।।
वीणा लेकर माँ सरस्वती,
ज्ञान का दीप जलाने आईं।
अज्ञान की काली गलियों से,
बुद्धि की ज्योति जगमगाई।।
किताबें बोलीं—“मित्र बनो,”
कलम ने कहा—“मत डरना।”
मेहनत से ही सपने सजते,
यह सच तुम , मत भूलना।।
आओ बच्चे, आज प्रण लें,
सीखेंगे हम रोज़ नया-नया ।
अच्छे बनकर, सच्चे बनकर,
रोशन करेंगे अपना जग सारा।
— गोपाल कौशल भोजवाल
