कविता

माँ सरस्वती का वरदान

माँ सरस्वती जब प्रकट हुईं, बसंत भोर उजास,
वीणा-कर में ज्ञान-विधा, मुख पर करुणा-वास।

पीत वसन धर धरती हँसी, सरसों बनी सुवर्ण,
हर कण में तेरा नाम रहे, हे माँ तू शरण्य-वर्ण।

मंद पवन जब गान करे, तब गूँजे मधुर तान,
जड़ मन भी तब जाग उठे, पाकर तेरा ध्यान।

अज्ञान तम का नाश हो, दीप जले विवेक,
वाणी हो शुद्ध, कर्म हों, सदा सत्य-अभिषेक।

बालक के हाथों अक्षर दें, गुरु के मुख में भाव,
श्रद्धा-भक्ति से भर दे माँ, जीवन का हर चाव।

न झूठ रहे, न दंभ रहे, न हो मन में अभिमान,
तेरी कृपा से सरल बने, मानव का हर प्राण।

बसंत पंचमी कह रही लो सभी माँ का वरदान,
विद्या, भक्ति, विवेक से, हो जग का कल्याण।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com