माँ सरस्वती का वरदान
माँ सरस्वती जब प्रकट हुईं, बसंत भोर उजास,
वीणा-कर में ज्ञान-विधा, मुख पर करुणा-वास।
पीत वसन धर धरती हँसी, सरसों बनी सुवर्ण,
हर कण में तेरा नाम रहे, हे माँ तू शरण्य-वर्ण।
मंद पवन जब गान करे, तब गूँजे मधुर तान,
जड़ मन भी तब जाग उठे, पाकर तेरा ध्यान।
अज्ञान तम का नाश हो, दीप जले विवेक,
वाणी हो शुद्ध, कर्म हों, सदा सत्य-अभिषेक।
बालक के हाथों अक्षर दें, गुरु के मुख में भाव,
श्रद्धा-भक्ति से भर दे माँ, जीवन का हर चाव।
न झूठ रहे, न दंभ रहे, न हो मन में अभिमान,
तेरी कृपा से सरल बने, मानव का हर प्राण।
बसंत पंचमी कह रही लो सभी माँ का वरदान,
विद्या, भक्ति, विवेक से, हो जग का कल्याण।
— रूपेश कुमार
