गीत/नवगीत

शीश झुका करते सम्मान

आजादी का अलख जगाने, जिनके था दिल में अरमान ।
उन सब वीर शहीदों का हम, शीश झुका करते सम्मान ।।

याद करे तेईस जनवरी, जन्में जब नेताजी बोस ।
बचपन से ही अंग्रेजों पर,भरा हुआ था जन्मे रोस ।।
गांधीजी के आंदोलन में, दिया बहुत था उनने साथ ।
किंतु अहिंसा के वाहक का,नहीं सुहाया उनको पाथ ।।
फौज बना आजाद हिंद की,खूब चलाया था अभियान ।

आग हृदय में सदा दहकती,उन्हें कहाँ झुकना स्वीकार ।
जीते मरते सदा देश हित, पाँव तले सहते अंगार ।।
जेलों में ही ब्रिटिश राज्य ने, उनके लिए बिछाई सेज ।
देख बोस के अमित पराक्रम, डरे बहुत थे तब अंग्रेज ।।
दूर देश में रह सुभाष ने, स्वयम हाथ में रखी कमान ।

आजादी के स्वप्न सँजोए, दिल मे जोश बढ़ा परवान ।
झेल रहे ते सभी यातना, किंतु मिशन पर थे गतिमान ।।
आज अभी आजाद देश में,मना रहे अपना गणतंत्र ।
अक्षुण्ण रहे यह संविधान भी, तभी रहेगा देश स्वतंत्र ।।
दसो दिशाएं इन शहीद का, गाती ख़ूब सदा यशगान ।

— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’

लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

जयपुर में 19 -11-1945 जन्म, एम् कॉम, DCWA, कंपनी सचिव (inter) तक शिक्षा अग्रगामी (मासिक),का सह-सम्पादक (1975 से 1978), निराला समाज (त्रैमासिक) 1978 से 1990 तक बाबूजी का भारत मित्र, नव्या, अखंड भारत(त्रैमासिक), साहित्य रागिनी, राजस्थान पत्रिका (दैनिक) आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ओपन बुक्स ऑन लाइन, कविता लोक, आदि वेब मंचों द्वारा सामानित साहत्य - दोहे, कुण्डलिया छंद, गीत, कविताए, कहानिया और लघु कथाओं का अनवरत लेखन email- lpladiwala@gmail.com पता - कृष्णा साकेत, 165, गंगोत्री नगर, गोपालपूरा, टोंक रोड, जयपुर -302018 (राजस्थान)