शीश झुका करते सम्मान
आजादी का अलख जगाने, जिनके था दिल में अरमान ।
उन सब वीर शहीदों का हम, शीश झुका करते सम्मान ।।
याद करे तेईस जनवरी, जन्में जब नेताजी बोस ।
बचपन से ही अंग्रेजों पर,भरा हुआ था जन्मे रोस ।।
गांधीजी के आंदोलन में, दिया बहुत था उनने साथ ।
किंतु अहिंसा के वाहक का,नहीं सुहाया उनको पाथ ।।
फौज बना आजाद हिंद की,खूब चलाया था अभियान ।
आग हृदय में सदा दहकती,उन्हें कहाँ झुकना स्वीकार ।
जीते मरते सदा देश हित, पाँव तले सहते अंगार ।।
जेलों में ही ब्रिटिश राज्य ने, उनके लिए बिछाई सेज ।
देख बोस के अमित पराक्रम, डरे बहुत थे तब अंग्रेज ।।
दूर देश में रह सुभाष ने, स्वयम हाथ में रखी कमान ।
आजादी के स्वप्न सँजोए, दिल मे जोश बढ़ा परवान ।
झेल रहे ते सभी यातना, किंतु मिशन पर थे गतिमान ।।
आज अभी आजाद देश में,मना रहे अपना गणतंत्र ।
अक्षुण्ण रहे यह संविधान भी, तभी रहेगा देश स्वतंत्र ।।
दसो दिशाएं इन शहीद का, गाती ख़ूब सदा यशगान ।
— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’
