गणतंत्र दिवस और वसंत के रंगों से ओत-प्रोत अंतस् की 78वीं गोष्ठी

लखनऊ से प्रसिद्ध कवि श्री चंद्र प्रकाश रस्तोगी जी (संपूर्ण रामायण, भगवद्गीता अनुवाद, दुर्गा स्तुति के लेखक) की अध्यक्षता में 29 जनवरी को डॉ पूनम माटिया के संयोजन-संचालन में अंतस् की 78 वीं मासिक काव्य-गोष्ठी में भारत के विभिन्न प्रदेशों से कवि-कवियित्रियों ने शानदार काव्य-प्रस्तुति से देश-प्रेम और आनंद की वृष्टि की.
ग़ाज़ियाबाद से पूजा श्रीवास्तव ने मधुर कंठ से प्रथम शारद-स्तुति की और फिर ग़ज़ल भी पढ़ी। ग़ाज़ियाबाद से ही दुर्गेश अवस्थी, डॉ सरिता गर्ग, हरियाणा से डॉ जयप्रकाश गुप्ता, दिल्ली से डॉ पूनम माटिया, डॉ मीना शर्मा और प्रकाश चंद्र जी ने गणतंत्र दिवस के संदर्भ में भारत-भू , सैनिकों, शहीदों, सनातन को समर्पित काव्य पाठ किया.
शक्ति-शौर्य-सामर्थ्य तेज पुन: दिखलाया है/ पूर्ण विश्व में भारत का परचम लहराया है|
शस्त्र-शास्त्रों से हो सबल यह आत्म-निर्भर धरा/ पुन: अब ‘भय बिनु होय न प्रीति’ स्मरण कराती है|
माटी से चन्दन-की ख़ुशबू हर दम आती है/ भारत माँ के वीरों का यशगान सुनाती है||.. डॉ पूनम माटिया
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शक्तिहीन की शांति–वार्ता कायरता कहलाती है/ डोल उठे जब चक्र सुदर्शन तो गीता बन जाती है.. चंद्र प्रकाश रस्तोगी
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श्वेत वासन सिर मुकुट विराजे/ चन्द्र वदन मुख मोहे माँ!
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जिनके बलिदानों से महके देश की आबो–हवा/ एक दीपक हम जलाएं उन जियालों के लिए.. पूजा श्रीवास्तव
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गाँव-गाँव, शहर-शहर में भगवा ध्वज फहराएंगे
तथा
तुमसे मिलने का बहाना चाहता हूं/ सच कहूं तो मुस्कुराना चाहता हूं
जानता हूं इश्क में रोना पड़ेगा/ फिर भी तुमसे दिल लगाना चाहता हूं.. दुर्गेश अवस्थी
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मत सोओ, आलस त्यागो तुम/ करती आह्वाहन भारत माँ, “सुध लो, निद्रा से जागो तुम!.. डॉ जयप्रकाश गुप्ता
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अच्छा था वह समय पुराना/ हमको वह भी नहीं भुलाना .. डॉ मीना शर्मा
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रच के अपनी पृष्ठभूमि वो कहानी हो गए .. डॉ सरिता गर्ग
वरिष्ठ कवि डॉ दिनेश कुमार शर्मा जी, अंतस् के संरक्षक नरेश माटिया, काव्य-रसिक कंवल कोहली, अर्चना गुप्ता तथा अन्य कई बतौर श्रोता जुड़े तथा अपनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाओं से कविताओं को सराहते रहे। अंत में दुर्गेश अवस्थी ने सभी को यथोचित धन्यवाद ज्ञापित किया.
