कविता

अलग-अलग दुनिया

यशपाल ने
देख लिया था
वर्षों पहले
बड़े घरों के
फटे परदों के
पीछे की कंगाली।

मूलभूत आवश्यकता पूर्ति हेतु
जद्दोजहद करते मर्दों को
अरमानों का गला घोंटती औरतों को
ख़्वाहिशों की शार्ट लिस्टिंग करते बच्चों को
दवाओं की पर्ची पर दिन घटाते बुजूर्गों को
ब्लैक ऐंड व्हाइट टीवी पर प्रचारित
रंग-रोगन के विज्ञापनों को देख
लार टपकाती दुलहिनों को
स्कूल से मायूस लौटते नौनिहालों को
परदे के पीछे दम तोड़ती एक दुनिया को।

मगर परदे के बाहर-
मर्दों की मूंछों पर वही ताव है
औरतों के घूंघट में वही आब है
बुजूर्गों में समृद्ध विरासत का गर्व है
दरवाजे पर धूमधाम से मनता हर पर्व है
पुराने करिंदे सलामी की औपचारिकता निभाते हैं
हम और वे एक साथ मुस्कुराते हैं
दोनों को आरक्षण की याद आती है
बस विपरीत नजरिए से।

घर के परदे
किसी रंगमंच के परदे से
कम नहीं होते
जिसके दोनों ओर
पात्र एक-से रहते हैं
पर बसती है दो अलग- अलग दुनिया।

— डॉ अवधेश कुमार अवध

*डॉ. अवधेश कुमार अवध

नाम- डॉ अवधेश कुमार ‘अवध’ पिता- स्व0 शिव कुमार सिंह जन्मतिथि- 15/01/1974 पता- ग्राम व पोस्ट : मैढ़ी जिला- चन्दौली (उ. प्र.) सम्पर्क नं. 919862744237 Awadhesh.gvil@gmail.com शिक्षा- स्नातकोत्तर: हिन्दी, अर्थशास्त्र बी. टेक. सिविल इंजीनियरिंग, बी. एड. डिप्लोमा: पत्रकारिता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग व्यवसाय- इंजीनियरिंग (मेघालय) प्रभारी- नारासणी साहित्य अकादमी, मेघालय सदस्य-पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी प्रकाशन विवरण- विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन नियमित काव्य स्तम्भ- मासिक पत्र ‘निष्ठा’ अभिरुचि- साहित्य पाठ व सृजन

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