मुक्तक
रक्षा अपनी बहुत जरूरी,हर दुश्मन के वार से,
सूझबूझ से बचा के खुद को करो वार औजार से,
बुजदिल को मरना पड़ता है,साहस जीवन पाता है,
रण में जीवन मिलता है बस शत्रु के संहार से ||
— शालिनी शर्मा
रक्षा अपनी बहुत जरूरी,हर दुश्मन के वार से,
सूझबूझ से बचा के खुद को करो वार औजार से,
बुजदिल को मरना पड़ता है,साहस जीवन पाता है,
रण में जीवन मिलता है बस शत्रु के संहार से ||
— शालिनी शर्मा