कविता

चौपाई

गणपति


प्रथम पूज्य हैं गणपति देवा।
श्रद्धा भाव से करिए सेवा।।
शुभ फल दायक देव गणेशा।
मिले कृपा कुछ रहे न शेषा।।


-शिव जी


श्रद्धा से शिव सुमिरन करिए।
भक्ति भाव नित पूजन करिए।।
संकट भोलेनाथ हरेंगे।
हर दुविधा से मुक्त करेंगे।।

शिव शंकर हैं औघड़ दानी।
महिमा उनकी किसने जानी।।


चौपाई – बजरंगबली


विनय हमारी हनुमत सुनिए।
कष्ट मुक्त जन-जन को करिए।।
आप हमें नादान समझिए।
राम कृपा का साधन बनिए।।


चौपाई – शनिदेव


शनीदेव जी किरपा कीजै।
भक्तों के सब दुख हर लीजै।।
भक्त आपके डरे हुए हैं।
रोग शोक से घिरे हुए हैं।।


सकल मनोरथ पूरण सारे।
शीश झुके जब प्रभु के द्वारे।।
मातु पिता अरु गुरु के चरना।
मस्तक सदा झुकाए रखना।।

*सुधीर श्रीवास्तव

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