कुण्डली/छंद

महका बाग

महका-महका बाग, भ्रमर सँग कलियाँ चहके।

डोल रही है डाल, ओस मोती सी दमके।।

रवि किरणों की आभ, चेतना कण-कण छाई।

आह्लादित है भोर, सृष्टि सजधज इतराई।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८