‘असम के प्रतिनिधि व्यक्तित्व’ असमिया समाज का दर्पण है
असम पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा प्रदेश है I यह प्रदेश अनेक संस्कृतियों का संगम है I श्रीमंत शंकरदेव की इस पुण्य भूमि में अनेक संस्कृति, सभ्यता, विचारधारा और परम्पराएं घुलमिलकर दूध में पानी की तरह एकाकार हो गई हैं I विभिन्न कालखंडों में यहाँ आर्य, द्रविड़, तिब्बती, बर्मन आदि आए और यहाँ के लोकजीवन में घुलमिलकर एक हो गए I असम में कामता, अहोम, सूतिया, कोच, भूइयां, कछारी साम्राज्यों ने शासन किया I संस्कृति, भाषा, परंपरा, रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार, वेश-भूषा आदि की दृष्टि से असम में बहुत विविधता है I यहाँ अनेक आदिवासी समूह, अनेक भाषाएँ, भिन्न-भिन्न प्रकार के रहन-सहन, खानपान और परिधान, अपने-अपने ईश्वरीय प्रतीक, धर्म और अध्यात्म की अनेक संकल्पनाएँ मौजूद हैं । देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक मनीषियों, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने असम के बहुमुखी विकास में योगदान दिया है I सौमित्रम की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘असम के प्रतिनिधि व्यक्तित्व’ में संस्कृति, साहित्य, कला, देशभक्ति, हिंदी प्रचार, राजनीति, खेल आदि के क्षेत्र में अग्रणी संस्कृतिकर्मियों, साहित्यकारों, कलाविदों, स्वतंत्रता सेनानियों, हिंदी प्रचारकों, राजनेताओं और खिलाडियों के व्यक्तित्व व कृतित्व का गवेषणात्मक विश्लेषण किया गया है I पुस्तक आठ खंडों में विभक्त है I संस्कृति खंड में माधव कन्दली, श्रीमंत शंकरदेव, माधवदेव, दामोदर देव, अजान फ़क़ीर, गुरु तेगबहादुर जैसे छह महापुरुषों के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित किया गया है I साहित्य खंड में सबसे अधिक 46 साहित्यकारों के व्यक्तित्व व कृतित्व का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है I असम में कला के क्षेत्र में योगदान करनेवाले मनीषियों के व्यक्तित्व-कृतित्व का मूल्यांकन कला खंड के अंतर्गत किया गया है I इसमें विष्णु प्रसाद राभा, भूपेन हजारिका सहित सत्रह कलाविदों की कला साधना का समेकित विवरण प्रस्तुत किया गया है I देशभक्ति खंड के अंतर्गत असम के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया गया है जिसमें चिलाराय, लाचित बरफुकन, कनकलता बरुआ सहित ग्यारह देशभक्तों के व्यक्तित्व और योगदान का विवरण है I इसी प्रकार हिंदी प्रचार, राजनीति और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करनेवाले अग्रणी व्यक्तियों का मूल्यांकन किया गया है I सौमित्रम विगत चार दशक से असम में हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं I उनकी यह पुस्तक असमिया समाज, संस्कृति और साहित्य को सम्पूर्णता में व्याख्यायित करती है I लेखक ने पुस्तक की भूमिका में अपना उद्देश्य प्रकट किया है-‘असम के प्रतिनिधि व्यक्तित्व’ नामक पुस्तक के प्रणयन का मुख्य उद्देश्य देश के अन्य क्षेत्र के लोगों को असम से परिचित कराना है ताकि देश के अन्य प्रदेश के लोग असम की संस्कृति, साहित्य, कला आदि के बारे में जान सकें I’ लेखक निश्चित रूप से अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल रहा है I यह पुस्तक संपूर्णता में असमिया संस्कृति, साहित्य और समाज की व्याख्या करती है I

पुस्तक-असम के प्रतिनिधि व्यक्तित्व
लेखक-सौमित्रम
प्रकाशक-हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
वर्ष-2025
पृष्ठ-374
मूल्य-1195/-
प्रकाशक मोबाइल-7217610640
