गीत/नवगीत

आशा की किरण

भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
गीत लिए यह नव जीवन का, मधुर हृदय में गाती है।

पावन करती मंगल सब का, खुशियां सब को देती है।
पीर दूर कर कुंठित मन की, विपदा सब हर लेती है।
हर्षित होता रोम रोम है, नव उमंग ले आती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।

वसंत पुलकित करती मन को, छा जाती हरियाली है।
कोयल मन की मधुर तान में, गाती बन मतवाली है।
स्फुरित करे है जन जीवन को, समृद्धि घर ले आती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।

न‌ई किरण जब आशा की हो, मान देश का होता है।
विकसित होती है मंजिल हर, बीज जीत का बोता है।
बजता ढंका अभिनंदन का, दुनिया शीश झुकाती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।

दुश्मन कांपे देख हकीकत, सच में सही दिखाते हैं।
दृढ़ निश्चय जब हम कर लेते, कर के वही दिखाते हैं।
थर-थर कांपे विश्व अभी से, अपनी चौड़ी जाती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995