आशा की किरण
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
गीत लिए यह नव जीवन का, मधुर हृदय में गाती है।
पावन करती मंगल सब का, खुशियां सब को देती है।
पीर दूर कर कुंठित मन की, विपदा सब हर लेती है।
हर्षित होता रोम रोम है, नव उमंग ले आती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
वसंत पुलकित करती मन को, छा जाती हरियाली है।
कोयल मन की मधुर तान में, गाती बन मतवाली है।
स्फुरित करे है जन जीवन को, समृद्धि घर ले आती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
नई किरण जब आशा की हो, मान देश का होता है।
विकसित होती है मंजिल हर, बीज जीत का बोता है।
बजता ढंका अभिनंदन का, दुनिया शीश झुकाती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
दुश्मन कांपे देख हकीकत, सच में सही दिखाते हैं।
दृढ़ निश्चय जब हम कर लेते, कर के वही दिखाते हैं।
थर-थर कांपे विश्व अभी से, अपनी चौड़ी जाती है।
भोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।
— शिव सन्याल
