कविता

मन्दिर

मन्दिर सनातन शक्ति के प्रतीक हैं,
मन्दिर आस्था केन्द्र धर्म के प्रतीक हैं।
सात्विक आचरण सात्विक व्यवहार हो,
मन्दिर संस्कार व संस्कृति के प्रतीक हैं।

मन्दिरों में प्रवेश के, नियमों का निर्धारण करें,
सनातन में आस्था नही, प्रतिबन्ध पालन करें।
धार्मिक चित्त हो, और आध्यात्मिक वृत्तियाँ,
मन्दिरों में स्वच्छता, पवित्रता अनुपालन करें।

है नहीं कुछ भी मुश्किल, अगर ठान लो,
धर्म विज्ञान अध्यात्म, मन्दिरों में जान लो।
ऊँच नीच जाति धर्म, सब छोड़कर आइये,
छल कपट अहंकार, त्यागना है मान लो।

दया धर्म का पाठ, मन्दिरों में पढ़ाया जाता,
धर्म सार मानवता, मन्दिर में समझाया जाता।
शस्त्र शास्त्र का समन्वय, यहाँ आकर देखिये,
गीता का सार कर्म, मन्दिर में सिखाया जाता।

मन्दिरों में गोशाला, गायों का संरक्षण जरूरी,
मन्दिरों में वेद पुराण, अध्ययन अध्यापन जरूरी।
राष्ट्र प्रथम हिन्दू सनातन, ज्ञान की प्रचार भी हो,
मन्दिरों में चौंसठ कलाएँ, शस्त्र शिक्षण भी जरूरी।

— डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन