कविता

डोरी विश्वास की

बहुत नाज़ुक है डोरी विश्वास की
बनाती ये रिश्तों को बेहद खास,
सजीव होते हैं दिलों के सब भाव
हो चाहे कितने दूर चाहे हो पास ।

कोई तो है मिला ईश्वर के जैसा
दिल में होता हैं ये प्यारा आभास,
दिल की जमीं और प्रेम की मिट्टी
सुख दुःख का मिश्रित एहसास ।

सम्बन्धों की ये सुंदर सी बगिया
हर फूल जिसका होता हैं खास,
रंग रूप रचना हैं अलग-अलग
पर प्रेम भरी मनमोहक मिठास ।

अटूट होता हैं ये विश्वास का रिश्ता,
नहीं लेता कभी जीवन से संन्यास,
आत्मा का बेशकीमती ये अलंकरण
छवि जिसकी मस्त मौला सी बिंदास ।

दस्तक देती है द्वार पर खुशियॉं
उत्साह “आनंद” से भरी हर श्वास,
आखिरी घड़ियों तक इस रिश्तें का,
मन में होता ख़ुबसूरत इक निवास ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु