कुण्डली/छंद

अरुण छंद

चाँदनी, प्रेम की, गंग-सी पावनी।

रश्मियाँ, नेह की, मोद मन फाल्गुनी।।

उर्जिता, प्रेम अरु, शांति की हो नमी।

साजना, प्रीत मधु, बंध हो रेशमी।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८