कुण्डली/छंद

सायली छंद

फागुनी

रंग बरसे

हिय हुलार हुलरे,

छलके प्रेम

साजना।

होलिका

प्रेम पर्व 

उमंग उल्लास रंग

मदहोश मन 

साजना।

रंगबिरंगी

कालिंदी तट

सँग राधा राधे

बाँसुरी धुन

सुरमई।

होली

रंगरंगीला पर्व 

प्रेम रस झरे 

खुशियाँ बाँटे

मिलजुल। 

झांझरी

बाजे ढोल

नाचे मन मयूर

थिरके पायली

होली।

हुडदंग

अबीर गुलाब

खेले मीत सँग

भर प्रेमरस

पिचकारी।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८