गीतिका
हमको उम्र चुरानी होगी
तब महफूज जवानी होगी
जिन यादों में बचपन होगा
वोही याद सुहानी होगी
कैसे काम चलेगा रोकर
पीड़ा दूर भगानी होगी
लक्ष्य कोई दुश्वार नहीं है
मन्जिल हमको पानी होगी
हारे या जीते कोई भी
नैतिकता अपनानी होगी
सब चीखों को सुनना सीखो
सबकी एक कहानी होगी
— शालिनी शर्मा
