गीत/नवगीत

रंगोत्सव

आओ सब मिल खेलें रंग और गुलाल
साथ ही मचाएं जी भरकर धमाल
नफ़रत के बीज जो होता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

जंग तो सदैव ही बस जख्म देनेवाली
जन-जन से छीन लेती खुशहाली
अंततः किसी के हाथ न कुछ लगेगा
आधी रह जाएगी गरीब की थाली।

बाद में उन सबको भी महसूस होगा
व्यर्थ में ही ठान डाली इतनी तकरार
नफ़रत के बीज जो बोता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

हम तो शांति में विश्वास रखने वाले
हैं सह-अस्तित्व के सदा से हिमायती
सबकी संप्रभुता का करते सम्मान
कभी न दिखाते अपनी दादागिरी ।

मजबूत हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था
सहज बदल जाती यहां पर सरकार
नफ़रत के बीज जो बोता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

कोई कोर-कसर न बाकी रहने देंगे
और जी भरकर होली में मस्ती करेंगे
झूमेंगे, नाचेंगे, भंगडा करेंगे
जन -जन के मन में उल्लास भरेंगे ।

ऊंच-नीच का सब भेदभाव मिटाकर
मारेंगे पिचकारी से रंग भरी धार
नफ़रत के बीज जो बोता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

नमकीन व गुझिया का आनंद लीजिए
और साथ ही ठंडाई का सेवन कीजिए
‌ मित्रों -परिवार संग गप्पे लड़ाकर
त्यौहार का मजा दोगुना कीजिए ।

जिनके पास थोड़े कम साधन हों
हो सके तो उन पर थोड़ा करें उपकार
नफ़रत के बीज जो बोता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
हम मनाएं त्यौहार होकर निर्भीक
सबकी भावनाओं का रखें ध्यान
हर त्यौहार देता कुछ न कुछ सीख।

सबके लिए शुभकर हो यह होली
प्रभु से हमारी बस एक ही मनुहार
नफ़रत के बीज जो बोता है बोए
हम तो लुटाएं गे बस प्यार ही प्यार।।

सबके लिए हो शुभकर यह होली
प्रभु से हमारी बस एक ही मनुहार
सबके लिए शुभकर हो होली
प्रभु से हमारी बस एक ही मनुहार।।

— नवल अग्रवाल

०३ मार्च २०२६

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

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