तुम्हारें इंतजार मे
भोर अपनी आँखें
मलते हुए जगी।
धूप की मुस्कान भी
कुछ फीकी सी लगी।
मै! रातभर ठहरी रही
नदियाँ के किनारे,
सिर्फ तुम्हारे आने के
इंतजार मे…
जब तुम आओगे तो
बसंती हवा साथ लाना।
पीली सरसों की ओढ़नी
लाकर मुझें ओढ़ाना।
हाथों मे हाथ लेकर
उस ओर लेकर जाना,
जहाँ बैठी है धरती
आसमां के प्यार मे।
सिर्फ तुम्हारे आने के
इंतजार मे…
तुम्हारें प्यार की पायल
पैरों मे पहन खनकाऊंगी।
मिट्टी मे धूल उड़ाकर
सौंधी खुशबूं उडाऊंगी।
घुल जायेगा तेरें – मेरे
प्यार का अहसास बहार मे
सिर्फ तुम्हारे आने के
इंतजार मे…
— निधि ‘मान सिंह’
