राजनीति

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध : एक नए विश्व संकट की शुरुआत

28 फरवरी 2026 की रात जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए, तो पश्चिम एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरण एक झटके में बदल गए। सीएनएन की 6 मार्च 2026 की लाइव रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान का सातवां दिन है और इजरायल ने तेहरान पर एक ‘व्यापक नई लहर’ के प्रहार शुरू किए — राजधानी की प्रमुख सड़क जोमहुरी एवेन्यू तक निशाना बनाया गया। इसी दिन इजरायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ भी हमले घोषित किए और लगभग पचास लाख लोगों को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों से हटने का आदेश दिया गया। वर्ल्ड रेडियो ने 6 मार्च 2026 की सुबह रिपोर्ट किया कि अमेरिका का कहना है वह ईरान की नौसेना को ‘बर्बाद’ कर रहा है। इससे पहले 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘रोअरिंग लायन’ के नाम से ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। उसी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हुई। बीबीसी न्यूज की 28 फरवरी रात की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई और ट्रंप ने स्वयं ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की।

वाशिंगटन पोस्ट की 3 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कई वरिष्ठ कमांडरों की हत्याएं की गई थीं, लेकिन जिस भौगोलिक फैलाव के साथ ईरान ने जवाबी हमले किए वह किसी को उम्मीद नहीं था। मनामा (बहरीन), दुबई, अबू धाबी, दोहा, कुवैत सिटी — इन सभी खाड़ी शहरों पर मिसाइलें और ड्रोन गिरे। एनपीआर की 4 मार्च 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि कुवैत में पोर्ट शुआइबा पर एक ड्रोन हमले में एक कमांड सेंटर पर हमला हुआ जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए — उनके नाम 4 मार्च को पेंटागन ने जारी किए। बहरीन की राजधानी मनामा में एक होटल और दो आवासीय इमारतों में आग लग गई जो बाद में बुझाई गई। कतर के अल-उदैद एयर बेस — जो मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है — पर भी ड्रोन हमले का प्रयास हुआ जिसे कतरी वायु रक्षा ने नाकाम कर दिया। ऑपरेशन के पहले हफ्ते में यह स्पष्ट हो गया कि यह एक ‘लिमिटेड डिकैपिटेशन ऑपरेशन’ नहीं रहा — यह पूरे क्षेत्र का युद्ध बन चुका है।

एनपीआर की 4 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने 165 छात्राओं को मारने वाले गर्ल्स स्कूल बम विस्फोट की जांच की मांग की। पेंटागन ने कहा कि वह घटना की जांच कर रहा है। उपग्रह चित्रों से संकेत मिले कि यह एक सटीक हवाई हमला था। रिपोर्ट में बताया गया कि यह स्कूल एक बड़े परिसर का हिस्सा था जिसमें एक क्लिनिक भी था। ईरानी राज्य मीडिया ने इस हमले को युद्ध अपराध बताया। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने नागरिकों पर हमलों की निंदा की। पीबीएस न्यूज की 4 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने घोषणा की कि वह ईरान में ‘और गहरे’ हमले करेगा और युद्ध ‘अभी शुरू ही हुआ है।’ रिपब्लिकन सांसद केटी ब्रिट ने कहा कि ट्रंप के पास ईरान में काम ‘खत्म करने’ का अधिकार है। वहीं डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी कि युद्ध और फैल सकता है। कांग्रेस में वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर मतदान हुआ लेकिन यह पास नहीं हुआ।

सीएनएन की 6 मार्च 2026 की लाइव रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के सातवें दिन भी ईरान के जवाबी हमले जारी हैं। सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तीन बैलेस्टिक मिसाइलें दागी गईं जिन्हें सऊदी रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। कुवैत की सेना ने ‘शत्रु मिसाइल और ड्रोन हमलों’ को इंटरसेप्ट किया। कतर में अल-उदैद बेस के खिलाफ एक और ड्रोन हमला नाकाम किया गया। नोवाया गजेटा यूरोप की 5 मार्च रिपोर्ट में यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण रूस-यूक्रेन शांति वार्ताएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं। स्पेन ने घोषणा की कि वह अमेरिकी बलों को अपने दो साझा सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। एनपीआर की 5 मार्च रिपोर्ट के अनुसार स्पेनिश सरकार ने ट्रंप प्रशासन के साथ यह मतभेद सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया।

सीएनएन के मैकगर्क के विश्लेषण के अनुसार ईरान ‘अराजकता और भ्रम का वातावरण बनाने’ की कोशिश कर रहा है। ईरान की रणनीति महंगी मिसाइलों पर नहीं, बल्कि सस्ते ड्रोनों पर आधारित है — जो उसके पास हजारों की संख्या में हैं। नतीजा यह है कि खाड़ी के हर प्रमुख शहर में सायरन बज रहे हैं, हवाई अड्डे बंद हो रहे हैं और लाखों नागरिक आतंकित हैं। बेरूत में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमलों ने एक सप्ताह में 100 से अधिक लोगों की जान ली। लेबनानी सरकार और नागरिक दोनों खुद को इस युद्ध के बीच फंसा पाते हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में 300 मिलियन से अधिक नागरिकों को एक साथ इस बढ़ते युद्ध के दायरे में बताया गया। ओबीआरएफ की मध्य पूर्व विश्लेषक समृद्धि विज ने कहा कि यह संकट इस बात को उजागर करता है कि ‘जब अस्तित्व का प्रश्न उठता है तो आर्थिक परस्पर-निर्भरता अवरोधक का काम बंद कर देती है और दबाव का बिंदु बन जाती है।’

सीएनएन की 3 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नागरिकों की पहली निकासी उड़ान 5 मार्च को अबू धाबी से डुलेस एयरपोर्ट (वाशिंगटन) पहुंची। सैकड़ों अमेरिकी नागरिक इस उड़ान में थे। एनपीआर की रिपोर्ट के अनुसार निकासी की जानकारी को गुप्त रखा गया था और परिवारों को फ्लाइट नंबर भी नहीं बताए गए। इंडिया के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी की ओर जाने वाली 850 से अधिक उड़ानें दो दिनों में रद्द की गईं क्योंकि दुबई इंटरनेशनल और हमद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने परिचालन बंद कर दिया। वाशिंगटन टाइम्स के अनुसार करीब 750 जहाज — जिनमें 100 कंटेनर पोत शामिल हैं — होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट अटके हुए हैं।

इस युद्ध की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है। कांग्रेस.गॉव की रिपोर्ट बताती है कि जून 2025 में भी अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। उस समय ईरान की संसद ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद करने का समर्थन किया था लेकिन सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अंतिम निर्णय टाला। अब 28 फरवरी 2026 के हमले में स्वयं खामेनेई की हत्या हो जाने के बाद प्रतिरोध कहीं अधिक उग्र है। आईआरजीसी ने 2 मार्च को सार्वजनिक रूप से घोषित किया कि ‘होर्मुज़ बंद है।’ ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना टैंकरों को एस्कॉर्ट करेगी, लेकिन वाणिज्यिक बीमा कंपनियों ने 5 मार्च से जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा रद्द कर दिया। इससे होर्मुज़ आर्थिक रूप से बंद हो गया है, भले ही इसे ‘कानूनी नाकेबंदी’ न कहा जाए। इस घटनाक्रम को आरबीसी कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने ‘1970 के दशक के तेल प्रतिबंध के बाद का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट’ बताया।

6 मार्च 2026 की शाम 6:30 बजे की स्थिति में यह युद्ध अपने सातवें दिन में है और इसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के तेल को ‘शून्य’ करना चाहते हैं। ईरान ने कहा कि वह ‘अंतिम सांस तक लड़ेगा।’ खामेनेई के उत्तराधिकारी का चुनाव चल रहा है लेकिन इजरायल ने उन बैठकों की इमारत को भी निशाना बनाया जहां उत्तराधिकारी को चुनने वाले वरिष्ठ मुल्ला बैठते हैं। एनपीआर के अनुसार अनेक संभावित उत्तराधिकारी इन हमलों में मारे जा चुके हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हमलों का समर्थन करते हुए कहा कि वे ‘एक टूटती दुनिया का चरम उदाहरण’ हैं। स्पेन और कनाडा के बीच यह मतभेद दर्शाता है कि पश्चिमी गठबंधन भी एकमत नहीं है। यह युद्ध केवल ईरान का युद्ध नहीं है — यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के भविष्य का युद्ध है।

भारत की प्रतिक्रिया सधी हुई और कूटनीतिक रही है। विदेश मंत्रालय ने ‘ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता’ व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम, तनाव से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। द वीक की 3 मार्च रिपोर्ट के अनुसार भारत का ‘डालस्ट्रीट’ (शेयर बाजार) कमजोर खुला, रुपए पर दबाव पड़ा और ऊर्जा आयात बिल बढ़ने की आशंका से चिंता गहरी हो गई। ओआरएफ की विश्लेषक समृद्धि विज ने कहा कि इस संकट ने स्पष्ट कर दिया है कि परस्पर-निर्भरता एक अस्थिर आधार है। फिर भी भारत ने न तो इजरायल के पक्ष में और न ही ईरान के पक्ष में कोई स्पष्ट बयान दिया। यही ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ है — लेकिन अब जब होर्मुज़ बंद है और भारत की आधी कच्चे तेल की आपूर्ति उसी से होती है, तो यह तटस्थता कितनी टिकेगी — यह सवाल 6 मार्च 2026 की सबसे बड़ी चुनौती है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563