गैस टंकी की मार पड़ी
गैस टंकी चार को बुक कराई,
सात को कीमत बढ़कर आई।
यहाँ साठ रुपए की मार पड़ी,
जेब पे हमारे ये भारी हैं पड़ी।
वाह! रे..हमारी प्यारी सरकार,
क्यों? किया हम पे अत्याचार।
सात तारीख बाद वसूल करते,
समझ में आता खुशी से भरते।
सोचा था थोड़ा सुकून मिलेगा,
रसोई का खर्चा तो कम रहेगा।
बावल्या ट्रंप युद्ध आग झेलेगा,
अरे ये विश्व पगल्या को सहेगा?
(संदर्भ – 7 से गैस 60/-महंगी, सरकार मार्च से वसूल रहीं)
— संजय एम तराणेकर
