ग़ज़ल
साथ हरदम तेरा निभाऊंगा।
हंसते हंसते फना हो जाऊंगा।।
ख़ाक में मिल के भी मेरे यारा।
रातों की नींद मैं चुराऊंगा।।
याद आओगे जब भी तुम मुझको।
तेरी तस्वीर मैं बनाऊंगा।।
देख लूंँगा तुझे मैं जी भर के।
रँगों से बाद में सजाऊंगा।।
आहिस्ता आहिस्ता कभी आना।
पलकों पर मैं तुझे बिठाऊंगा।।
— प्रीती श्रीवास्तव
