पिता एक गाथा है
मौन सा सागर
गहराई में छुपे
अनकहे सपने
कठोर सा रूप
भीतर कोमल मन
छांव सा स्नेह
थामे हर दर्द
होंठों पर मुस्कान
अडिग सा वृक्ष
धूप में जलते
संतानों की खातिर
सपनों के साथ
थके कदम भी
रुकना नहीं जाने
जीवन पथ पर
संघर्ष कथा
हर सांस में लिखी
अमर गाथा
— डॉ. अशोक
