बाल कविता

1- बादल

बादल देखो,
हवा में देखो।
लहराते देखो,
मंडराते देखो।

गरजते देखो,
टपकते देखो।
बूंद-बूंद देखो,
गांवों में देखो।

जाते हुये देखो,
बातें करते देखो।
खेतों में देखो,
झमाझम देखो।

रंग-रंग के देखो,
काले-काले देखो।
सावन में देखो,
बादल को देखो।

2- मेढक

बड़ा मेढक आया,
तेजी से टर-टर बोला।
पीले रंग का आया,
खेतों में वह डोला।

कितना है प्यारा,
दौड़ रहा खेतों में।
बच्चों ने मेढक देखा,
ताली बजाते खेतों में।

मेढक और तेज बोला,
पानी भी तेज बरसा।
भीग रहे सारे बच्चे,
एक मेढक जोर से हंसा।

उस मेढक को बच्चों ने,
हाथों से पकड़ लिया।
मेढक जोर से छटपटाया,
बच्चों ने मेढक छोड़ दिया।

3- तितली

तितली उड़ी आसमां में,
इधर-उधर भाग रही है।
कभी इस डाल पर तो,
कभी घासों पर बैठ रही है।

मस्ती में घूम रही है,
फूलों का रस चूस रही है।
सरसों के फूलों पर वह,
घर-आंगन में नाच रही है।

जब छत पर आती तितली,
बच्चे सारे पकड़ते तितली,
मौज-मस्ती करते बच्चे सब,
छत से उड़ जाती तितली।

बच्चे पकड़ नहीं पाते तितली,
हाथ मलते रह जाते सब बच्चे।
तितली दौड़ लगाती छत के ऊपर,
तितली को देखते रह जाते बच्चे।

4- नानी

नानी सब बच्चों को भाती,
सुबह दही-जलेबी लाती।
सब बच्चे मिलकर खाते,
सच में नानी खुश हो जाती।

नानी संग बच्चे मेला जाते,
मेले में सब खिलौने लेते।
बड़ा मजा आता मेले में।
सब मिलकर चाट खाते।

किसी ने गुब्बारे खरीदा,
किसी ने गुल्लक खरीदा।
किसी ने झुनझुना तो किसी ने
नानी के लिए चिमटा खरीदा।

नानी के संग सब लौट पड़े,
सारे बच्चे खूब उछले कूदे।
नानी बच्चों संग ठहाका लगाया,
सब बच्चे नानी के ऊपर लदे।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com