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मधुरिम बाल काव्य धारा

बाल मंच दक्षिण भारत ईकाई की जुलाई माह की काव्य गोष्ठी संस्था के संस्थापक आदरणीय डॉ .नरेश नाज़ सर के सान्निध्य में 25 जुलाई शनिवार शाम 4.30 बजे आयोजित की गई । इस काव्य गोष्ठी में दक्षिण भारत के तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल राज्यों से 17 बाल प्रतिभागियों ने बढ़ -चढ़कर भाग लिया और बहुत ही प्यारी-प्यारी कविताएँ सुनाईं । बाल काव्य गोष्ठी का प्रारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ । माता शारदे का आह्वान कर सभी ने बारी-बारी से काव्य पाठ किया । गोष्ठी की अध्यक्षता और संचालन बाल मंच दक्षिण भारत इकाई की अध्यक्ष मोनिका डागा “आनंद” ने बहुत बेहतरीन किया। बच्चों ने आषाढ़ को सुरों में विदा किया और सावन का काव्यमय मधुर स्वागत किया।
बाल प्रतिभागियों के नाम इस प्रकार है –
वेदा ऐ. – हिंदूस्तान हमारा है, हरिओम यादव – हिंदी से प्यार करो, आद्या धानुका – सेवा ही सच्ची महानता है, विश्वंत साईं – पापा क्यों अच्छा लगता है अपना प्यारा-प्यारा घर, शरद – मैं गाँधी बन जाऊँगा, प्रतीक्षा – बंदर मामा पहन पजामा दावत खाने आए, मोक्ष – फूल बिछें हो या कॉंटे हो, विराक – सोच रहा हूँ इस गर्मी में चंदा मामा के घर जाऊँ, विहान – जीवन नहीं मरा करता है, माहीरा – कोयल रानी कोयल रानी, मीनाक्षी कृष्णा डी. – ओह ! हे फूल तुम जो सबसे सुंदर, आयुष – यह पावस का प्रथम दिवस, उत्कर्षा – काले-काले बादल छाए, प्रीतम – मेरे ऑंगन में सुबह सवेरे चिड़िया आती, स्वास्तिका – इन्द्रधनुष, मरियमित्रन – अद्भुत माया और माही – फूल, फूल तुम कितने अच्छे आदि । सभी बाल प्रतिभागियों की सुरमई काव्य प्रस्तुति बेहद शानदार रही ।
सभी बाल कलाकारों का उत्साह आदरणीय सरला सिंह ‘सरल’ जी ने बढ़ाया और बच्चों के लिए एक प्यारी बाल कविता कितने प्यारे लगते हो तुम, सुनाई और हमारा मार्गदर्शन किया । अंत में मोनिका डागा “आनंद” ने भी एक बाल कविता “बचपन ” सुनाई और धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभी को बाल दिवस की शुभकामनाएँ दी ।

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु