लघुकथा

सहगामिनी

बचपन से ही सुनता आया था माँ बाबूजी ताऊजी और बहनों से- पूत के पांव पालने में ही नज़र आते हैं। इसके कुंडली में भी लिखा है- यह बालक बड़ों के मान-सम्मान का ख्याल रखेगा । परिवार का नाम रौशन करेगा । धनवान होने के साथ-साथ बालक यशस्वी भी होगा ।‌
ज्योतिषि-गणना सच साबित हुई। पांचवीं कक्षा में ही उसे अच्छी शिक्षा के लिए बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया गया। गर्मी की छूट्टियों में ही वह घर आता । पूरे परिवार के सपनों का बोझ हर बार उसके कंधों पर बढ़ता ही गया।
समय पर अच्छी कंपनी में नौकरी भी लगी । इकलौता बेटा होने की वजह से ऋण लेकर खूब धुमधाम से बहनों की शादी भी कराई । बड़ी दीदी की शादी से पहले पूरे परिवार को माँ की इच्छा का मान रखते हुए, माँ वैष्णो देवी की यात्रा भी करवाया । अपनी शादी में एक-एक गले का चेन तो दीदियों को देना ही पड़ेगा। ऐसा फरमान कहूं या आदेश माँ उसे सुना चुकी थी ।‌
कहां से लाऊं लाखों रूपये? दीपिका से प्रेम-विवाह करने की बात सुनते ही पूरा परिवार बैरी लगने लगा था । सभी के आकांक्षाओं का बोझ, परिवार के सपनों का बोझ बढ़ता ही जा रहा था । ऐसा लग रहा था उसकी सांसें थम गई है वह शुन्य में विलीन हो रहा ।
थोड़ा चेतन्य होते ही माँ की आवाज सुनाई दी- “कलमुंही अपसगुनी है यह लड़की घर आने से पहले ही मेरे बेटे के हंसते-खेलते दुनिया में ग्रहण बन गई । अभी शादी भी नहीं हुई है और यह अपना रंग दिखाना शुरू कर दी। इतने मंहगे अस्पताल का बिल कौन भरेगा ।” माँ बाबूजी आपस में बातें करते हुए भुनभुना रहे थे।
तभी दीपिका की आवाज सुनाई दी- “आप लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, सारे बिल मैं पेमेंट कर चुकी हूँ आप लोग यश को घर ले जायें ।”
दीपिका की बातें सुनकर ऐसा लगा मानों सारे बोझ पल भर में उतर गये । बोझ बांटने वाली ने हाथ जो पकड़ लिया ।

— आरती राय

*आरती राय

शैक्षणिक योग्यता--गृहणी जन्मतिथि - 11दिसंबर लेखन की विधाएँ - लघुकथा, कहानियाँ ,कवितायें प्रकाशित पुस्तकें - लघुत्तम महत्तम...लघुकथा संकलन . प्रकाशित दर्पण कथा संग्रह पुरस्कार/सम्मान - आकाशवाणी दरभंगा से कहानी का प्रसारण डाक का सम्पूर्ण पता - आरती राय कृष्णा पूरी .बरहेता रोड . लहेरियासराय जेल के पास जिला ...दरभंगा बिहार . Mo-9430350863 . ईमेल - arti.roy1112@gmail.com