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‘कथा संचय’ के लोकार्पण में संजय एम तराणेकर भी सम्मानित

इंदौर | वरिष्ठ साहित्यकार  सुजाता देशपांडे द्वारा संपादित एवं संकलित नवसृजित कहानी-संग्रह ‘कथा संचय’ का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार को श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर के सभागार में साहित्यिक गरिमा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुआ।

समारोह में महाराष्ट्र साहित्य सभा, इंदौर के  प्रमुख अतिथि श्री अश्विन खरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि श्रीमती सुजाता देशपांडे का यह नवसृजित प्रयास अत्यंत अभिनव और प्रशंसनीय है।  इसमें देश के विभिन्न राज्यों के रचनाकारों की चुनिंदा कहानियों का समावेश किया गया है, जिससे यह संकलन साहित्यिक विविधता और सांस्कृतिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।  समिति के अध्यक्ष श्री अरविंद जवळेकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। पुस्तक की विस्तृत समीक्षा डॉ. ज्ञानेश्वर तिखे ने की। इस कथा-संग्रह में देश के विभिन्न क्षेत्रों के 37 रचनाकारों की कहानियों में कवि, लेखक व समीक्षक संजय एम तराणेकर की कथा “शक्कर का डिब्बा और राजू” भी सम्मिलित की गईं हैं। जो अस्सी के दशक को ध्यान में रखकर लिखी गईं हैं। तब के बच्चों का बचपन तंगी की हालत में गुजरता था। मिठाई खाने से वंचित बच्चे शक्कर को ही मिठाई का विकल्प मान खा लिया करते थे। इस अवसर पर संग्रह मे जिन रचनाकारों की कथा प्रकाशित हुई उन्हें  स्मृति चिन्ह के साथ कथा संग्रह भी प्रदान कर सम्मानित किया गया l इस पुस्तक की विशेषता यह रही की साहित्यकार सुजाता देशपांडे ने स्वयं अपने खर्चे से यह पुस्तक प्रकाशित की और रचनाकारों से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया, ऐसा बिरलें ही देखने में आता है।

संजय एम. तराणेकर

जन्म वर्ष 1968 कवि, स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार। शिक्षा स्नातक एवं गायन में 1986 में विद् किया होकर केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद् द्वारा हिन्दी आषुलिपि प्रतियोगिता में वर्ष 1992 प्रषस्ति-पत्र प्राप्त। विशेष रूचि-बॉलीवुड फिल्में एवं संगीत, पुस्तक समीक्षा एवं राजनीति। मैं मूलतः मध्य प्रदेश के स्वच्छता में हैट्रिक लगा चुके एवं चार बार नंबर वन बनें स्मार्ट सिटी इन्दौर का निवासी हूँ। 1990 के दशक में लेखन में मन रमने लगा और ‘पत्र संपादक के नाम‘ से अपनी प्रारंभिक शुरूआत की। लेखकीय सुकून कितना संतोष देता है, इसकी बात ही कुछ और है। युवा होने पर फिल्मी कलाकारों की तरफ झुकाव ने फिल्मों पर आलेख लिखने की प्रेरणा दी। इसमें मेरी रूचि भी थी। विशेषकर पुराने फिल्मी कलाकारों के जीवन से सम्बंधित आलेखों पर अधिक ध्यान आकर्षित रहा। बावजूद इसके लघु कथा व कविता (बतौर युवा कवि आकाशवाणी इन्दौर में कविता पाठ के भी कई अवसर प्राप्त हुए है।) के अलावा सामयिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विषयों पर समय-समय पर अपनी लेखनी को आयाम देने के प्रयास आज भी अनवरत हैं। अब तक विभिन्न समाचार-पत्रों में मुख्य रूप से बॉलीवुड/सिनेमा की साप्ताहिक मेगजीनों में आलेखों एवं पुस्तक समीक्षाओं का प्रकाशन हो चुका है। इनमें ‘लोकमत समाचार-आकर्षण व शो टाईम, राजस्थान पत्रिका-बॉलीवुड, पंजाब केसरी व दैनिक ट्रिब्यून के मनोरंजन, राज एक्सप्रेस-राज सिनेमा, द सी एक्सप्रेस-सी सिनेमा, हरि-भूमि के रंगारंग व रविवार भारती, चौथा संसार के बॉलीवुड, बीपीएन टाईम्स के शो बीपीएन व तरंग, लोकदशा के पर्दा-बेपर्दा व विविधा, नव-भारत एवं स्वतंत्र भारत के अलावा कई स्थानीय समाचार-पत्रों में भी आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। वहीं ‘स्वतंत्र वार्ता एवं डेली हिन्दी मिलाप‘ में कई वर्षो तक नियमित रूप से लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 31, संजय नगर, इन्दौर-452011 मध्य प्रदेश, (वार्ता+वाट्स एप) 98260.25986 ईमेलः s.taranekar@rediffmail.com, Facebook – https://www.facebook.com/Taranekar9

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