लघुकथा – घाटे का सौदा
सूरज के मोबाईल पर मैसेज आया कि देश के साहित्यकारों की रचनाओं का एक वृहद ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है | जिसमें वह भी शामिल है | उसकी भी दो रचनाओं को स्थान मिला है | मैसेज पढ़कर उसे बहुत ख़ुशी हुई | उसे याद आया लगभग एक वर्ष पहले उसने इस वृहद ग्रन्थ के लिए अपनी रचनाएँ भेजी थीं | उसने तुरंत उस नम्बर पर फोन लगाया | किसी भद्रजन ने फोन उठाया बड़े अदब से बात की | जब सूरज ने ग्रन्थ की प्रति लेने के लिए कहा तो उन्होंने बताया किआप हमारे बैंक खाते में मात्र छः सौ रूपये जमा करवा दें | राशी मिलते ही एक प्रति आपको रजिस्टर्ड डाक से भेज दी जाएगी | छः सौ रुपये सुनते ही उसकी रचना – प्रकाशन की ख़ुशी एकदम ठंडी पड़ गई | बेरोजगार सूरज को कवितायेँ लिखना भी घाटे का सौदा लगने लगा | उसने चुपचाप फोन काट दिया
