अन्य बाल साहित्य

शरीर के अंगों की बाल पहेलियाँ

1 मुँह में रह करती है लप-लप।
हर व्यंजन खाती है गप – गप।
लंबी – चौड़ी, लाल, लचीली।
बोली बोले खरी – रसीली।

2 चेहरे पर हैं दो दरबान।
आवाजों पर देते ध्यान।
सुनते बातें, मृदु संगीत।
सुंदर वचन सुनें बन मीत।

3 धड़ – धड़ धड़क रहा अविराम।
करना रक्त – संचार है काम।
स्वस्थ रखें, न दें आघात।
नहीं तो बिगड़ जाएगी बात।

4 चेहरे के सम्मुख दो अंग।
देख रहे जग, लिए उमंग।
सोते समय हो जाते बंद।
ध्यान रखें, न दृष्टि हो मंद।

5 तन का बड़ा आंतरिक अंग।
रहे स्वस्थ आहार के संग
करे हर समय रक्त को साफ।
रोग पीलिया करे न माफ।

6 मुख के ऊपर अंग है एक।
श्वास -क्रिया का काम है नेक।
खुशबू, बदबू का दे ज्ञान।
प्रतिक्षण सेवा ध्येय महान ।

7 रक्त में आक्सीजन पहुँचाते।
कार्बन डाईआक्साइड बाहर लाते।
श्वसन-क्रिया ही प्रमुख है काम।
पल भर भी न करें विश्राम।

8 मुँह के अंदर ही रहते हैं,
देते हैं सुंदर मुस्कान।
भोजन काटें, कुचलें, पीसें,
जिसे पचाना हो आसान।

उत्तर – 1 जीभ 2 कान 3 हृदय 4 आँख 5 लीवर (यकृत) 6 नाक 7 फेफड़े 8 दाँत

— गौरीशंकर वैश्य विनम्र

*गौरीशंकर वैश्य विनम्र

117 आदिलनगर, विकासनगर लखनऊ 226022 दूरभाष 09956087585

Leave a Reply