गीत/नवगीत

सज गए हैं बप्पा फिर बाज़ारों में

सज गए हैं बप्पा फिर बाज़ारों में
अब होगा मोल तोल खरीददारों में ,

कोई पूछेगा—कितने के हैं?
कोई कहेगा—थोड़े कम कर दीजिए!
अब भाव तय होंगे भगवान के भी
भक्तों की भीड़ भरी बाजारों में |

क्यों प्रथा बनी भगवान बनाने की ऐसी,
क्यों आ गई ये रस्म भी त्योहारों में?

भावनाओं से पूजन हो,
भावों में ही हो दर्शन,
फिर भक्त नहीं दिखेंगे
लंबी-लंबी कतारों में।

कोई जो समझेगा बात मेरी
वो तो होगा कोई एक हजारों में

ध्यान करो ईश्वर का मन से
तब होगा असर पुकारों में

ईश्वर को शोर नहीं,
सच्चे मन की आवाज़ चाहिए,
कीमती मूर्तियां नहीं, पूजन को
मन में श्रद्धा और विश्वास चाहिए।

जिसे देखना हो ईश्वर,
वो अपने भीतर झाँक कर देखे,
कब किस मिले हैं भगवान ,
भीड़ भरे बाज़ारों में?

भावनाओं से पूजन हो भावों में हो दर्शन
फिर भक्त नहीं दिखेंगे लंबी कतारों में

कोई जो समझेगा बात मेरी
वो तो होगा एक हजारों में
ध्यान करो ईश्वर का मन से
तब होगा असर पुकारों में

🙏 गणपति बप्पा मोरया 🙏

— प्रज्ञा पांडे मनु

*प्रज्ञा पाण्डेय 'मनु'

वापी़, गुजरात

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