कविता

पता नहीं

उदास हूं खुश हूं पता नहीं
मैं हूं या नहीं हूं पता नहीं
जिंदा हूं या बेजान हूं पता नहीं
मैं हूं या नहीं हूं पता नहीं
मेरे पास पास लोग है या नहीं है पता नहीं
कोई साथ हैं या नहीं है पता नहीं
मैं हूं या नहीं हूं पता नहीं
मेरे पास मन है या नहीं है पता नहीं
मैं कहां हूं पता नहीं
मेरे अंदर जान है या नहीं है पता नहीं
मेरा पास दिल है या नहीं है पता नहीं
क्या मैं एक बेजान हूं?

— गंगा मांझी

गंगा मांझी

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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