कविता

हर ख़्वाब उन्हीं के नाम

हर पल उनका इंतज़ार करते थे,
उनकी हर आदतों पर मरते थे,
वो हर बात जुबां से नहीं,
अपनी निगाहों से करते थे।

दिल में उतारा है तेरी हर बात को,
ख्यालों में रहता हूँ तेरे हर एक रात को,
चाहा है मैंने बस तुम्हारे ही साथ को,
थामूंगा मैं बस तेरे ही हाथ को।

मेरे लिए तुम संभलकर रहना,
सितारों का आसमान बनकर रहना,
जीने वाले तो ऐसे बहुत हैं,
मगर तुम मेरी जान बनकर रहना।

वाकिफ हूँ तेरी हर बातों से,
चैन नहीं है मुझे इन रातों में,
ख्वाबों में तुम आया करती हो मेरे,
तुम्हारा नाम है मेरी हर साँसों में।

— मोनिका जाखड़

मोनिका जाखड़

चुरू (राजस्थान)

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