लघुकथा – घर का सुख
स्कूल के बगल में आर्मी का ट्रांजिट कैंप होने के कारण आते- जाते फौजी वहां रुकते। घर से आते फौजी
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Read More“माँ, तुम मेरी चिंता क्यों करती हो?” “क्यों न करूँ,अभी तक न तुम्हारी नौकरी लगी है और न शादी हुई
Read Moreउस दिन हीरालाल ने आशा को गोद में क्या उठाया, लगा उसने पारसनाथ पहाड़ को ही उठा लिया है और
Read Moreदिन महीने साल देखते -देखते बीत गए। नीलिमा ने ग्रैजुएशन की पढ़ाई भी पूरी कर ली। मध्यम वर्गीय परिवार में
Read Moreकछुआ और खरगोश नंदनवन में एक खरगोश रहता था। नाम था उसका- चिपकू। चिपकू बहुत घमंडी, बड़बोला तथा चटोरा था।
Read Moreइलेक्शन ड्यूटी का हौव्वा जिस प्रकार अस्पताल और अदालत एक आम आदमी कभी अपने शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में
Read Moreबनी बनाई चीजों को तोड़ना और फिर जोड़ के देखना, छोटे भाई के खिलौने को लेकर दूर भाग जाना, कभी
Read Moreमिस्टर शर्मा और कमल कांत बचपन के साथी तो थे ही आज भी सुख दुख के साथी हैं | दोनो
Read Moreपेड़ को नई कोंपलों से भरा देख अंकुर चकित हो गया। दस दिन पहले तक पेड़ में एक भी पत्ता
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