घोड़े की अपनी शान है
एक जानकारी के मुताबिक पंजाब के फरीदकोट में आयोजित घोड़ों के मेले में पांच लाख से पांच करोड़ तक की कीमत के घोड़े आए. इसमें कुछ खास घोड़े भी शामिल थे, जिन्हें देखने के लिए लोगों में गजब का उत्साह दिखाई दिया. इस मेले में देव नाम का घोड़ा भी शामिल हुआ।प्राचीन ग्रंथों मे बताया गया है की देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमे चौदह रत्न निकले थे |उन्ही रत्नों मे “उच्चे श्रवा” घोडा भी था | देखा जाये तो राजा -महाराजाओं से लेकर भारतीय सेना पुलिस के पृथक अश्वारोही दलों मे घोड़े अभिन्न अंग बनने के साथ महत्वपूर्ण साधन माने जाते है| दुर्गम स्थानों ,जंगल, पहाड़ो आदि के लिए घोड़ों की उपयोगिता महत्वपूर्ण होती है |घोड़े के शरीर पर रंग,चिन्ह ,ऊँचाई से घोड़ो की कुशलता और काम में आने वाला जाना जाता है ।जैसे अश्वमेघ यज्ञ के समय घोड़े की पहचान अनुसार ही घोड़े प्राचीन समय में में छोड़े जाते थे । मारवाड़ी घोड़े के कान ऊपर जाकर आपस मे मिल जाते है | राजस्थान मे तो अश्व दिवस भी मनाया जाता है | घोडा पालना हर किसी के बस की बात नहीं होती है| घोड़े कि सफाई ,मालिश,पोष्टिक आहार महंगा होता है |घोडा पालने मे खर्च ज्यादा आता है| घोडा पालने का शौक काफी महंगा होने के बावजूद शौकिया लोग घोड़े के बिना अपनी जिन्दगी को अधूरी समझते है |खैर ,जिनके पास घोडा हो उसकी शान अलग ही होती है |
— संजय वर्मा “दॄष्टि “