कंगाल कर गए नेता
आई आँधी चुनाव की तो डर गए नेता।गहरी थी नींद घबरा के उठ गए नेता।।कब तलक और आराम गाहों में
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Read Moreआज जब आप दोनों हमारे साथ नहीं हैंतब लगता है मैं एकदम अकेला हो गया हूँ,सुख-समृद्धि, मान सम्मान के बाद
Read Moreमाता पिता की कर ले सेवा।खायेगा तू मिश्री मेवा।।मान ले प्यारे मेरा कहना।जीवन का ये सुंदर गहना।। सबके कहाँ नसीब
Read Moreआइए! नया आरंभ करते हैंनव संकल्प का जयघोष करते हैं।कम से कम कुछ तो नव आरंभ करते हैंहृदय की वेदना
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
Read Moreबंगाल की ‘धरती’ आज कुछ और कहती है,सदियों की ‘चुप्पी’ जैसे अब टूटती रहती है।इस हवा में घुल रहीं है
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