ग़ज़ल
कुछ नया देखने इधर आयापर तमाशा वही नज़र आया कुछ नहीं है सिवाय वीरानासोचता हूँ कि मैं किधर आया भेंट
Read Moreवटवृक्ष की छाँव तले, यूं ‘श्रद्धा का दीप’ जलें,सावित्री के ‘अटल-प्रण’ से जीवन फिर सँवरें। माथे पर सिंदूर सजा, मन
Read Moreप्यारे देशवासियों से करबद्ध गुहार फिर एकबार लगाई,आ. प्रधानमंत्री मोदी जी की सात अपीलें सामने आई,समय की मॉंग और सुझबूझ
Read Moreकैसा इनका हाल, आप हम सब ही जानें।बात अलग है और, नहीं सरकारें मानें।।नहीं सरकारें मानें, राम कहानी इनकी।भरते सबका
Read Moreउजालों से मिलती है सीखबोध कराता है विश्वास, संकल्प के साथसहनशीलता की खामोशी का,जीवन यात्रा की अनवरत यात्रा के लिएहमारी
Read Moreरिश्तों की डोरमौन में भी बोलती हैदिल की भाषा में एक मुस्कान सेटूटे पल जुड़ जाते हैंनर्म एहसास में समय
Read Moreभारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण,नई सुबह है, नया संदेश- जनगणना की ऋतु है आई।सही-सही देना जानकारी, तभी बजेगी मधुर
Read Moreइतना टूटा हूं किशब्द भी साथ छोड़ देते हैंखामोशी बोलने लगती है रास्ते धुंधले से हैंकदम पहचान खो बैठे हैंपर
Read Moreमन में कई इच्छाऍंबुद-बुद होती रहती हैं,अगर उस ओर ध्यान दें तोहम अपना रास्ता भूल जाते हैं। चित्त की सहज
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