पंचायतें, पितृसत्ता और न्याय का प्रश्न
क्या उसे गरीब आदमी की बेटी होने के कारण क्षमा मिल गई? यहाँ के मुद्दे पंचायतें, पितृसत्ता और न्याय का
Read Moreक्या उसे गरीब आदमी की बेटी होने के कारण क्षमा मिल गई? यहाँ के मुद्दे पंचायतें, पितृसत्ता और न्याय का
Read Moreमृत्यु कब, कहाँ और कैसे आएगी, यह अज्ञात है। हमारे जीवन में, जो सामान्य सी बात लगती है, वैसे ही
Read Moreरात अब घड़ी में आती है, शहर में नहीं। घड़ी बारह बजने का ऐलान करती है, लेकिन शहर का दिन
Read Moreमानसून के आगमन से उत्तर भारत में एक विशेष आकर्षण आ जाता है। सावन और तीज के दौरान हरे-भरे खेतों,
Read Moreडॉ. विजय गर्ग हर पीढ़ी अपने समय की कुछ विशेष आकांक्षाओं और सफलता के मापदंडों के साथ बड़ी होती है।
Read Moreभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी भी समाज के चरित्र का दर्पण होती है। यह संस्कृति
Read Moreहौसलों में अगर उड़ान हो तो मंजिल निश्चित है, जीवन में कठिनाइयाँ आएंगी लेकिन फिर भी मंजिल मिलना निश्चित है
Read Moreहरियाणा के जींद जिले में नौगामा खाप की महापंचायत द्वारा प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के 21 गांवों में प्रवेश
Read Moreप्रकृति जब अपनी तमाम नेमतों और रंगों के साथ खुलकर मुस्कुराती है, तो वह पल केवल ऋतु परिवर्तन का नहीं,
Read Moreसमाज की संवेदनहीनता अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि खुले घाव की तरह फैल रही है। जब कोई पिता,
Read More