सामाजिक

“द पावर ऑफ़ ए वुमन: लाइक ए टी बैग”

कतरा कतरा घुल रही हूँ दर्रा दर्रा पिघल रही हूँ पुर्ज़ा होते जिस्म से मैं.. ज़र्रा जर्रा निकल रही हूँ क्या आपने कभी यह कहावत सुनी है, “एक महिला चाय की थैली की तरह होती है,” जब तक वह गर्म पानी में न हो, आप कभी नहीं जान सकते कि वह कितनी मजबूत है! इस […]

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दुनियां में माता पिता का अपनी संतान से रिश्ता सबसे अनमोल है

भारत की मिट्टी में ही संस्कार है। भारत में जिस प्रकार के संस्कार, भाव, आस्था परोपकार और जैसी भावना है, ऐसी हमें वैश्विक स्तर पर कहीं दिखाई नहीं देगी ऐसा मेरा मानना है। क्योंकि भारत की मिट्टी में ही ऐसे भाव होते हैं कि यहां रहने वाला हर वासी स्वभाविक ही ऐसे भाव से ओतप्रोत […]

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अपनों के लिए वक्त को.. रुकना तो चाहिए

आजकल हर इंसान अपने जीवन में जिस प्रकार भागा दौड़ी कर रहा है और भाग रहा है अपने लक्ष्य और अपने गंतव्य की ओर.. सबसे ज्यादा नुकसान उसके उन रिश्तो को ही हो रहा है जिनके लिए वह यह भागा दौड़ी और अथक परिश्रम कर रहा है। उसने इस अंधाधुंध सफर का चुनाव जिनके लिए […]

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बालिकाओं में शिक्षा के बाद परिवर्तन व नारी का स्थान

आज के समय में शिक्षा का खूब – खूब विस्तार हुआ है । इसके विस्तार के परिणामस्वरूप बालिकाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है | बालिकायें शिक्षा प्राप्त करने के बाद घर , समाज आदि कीउन्नति में तो अपना अमूल्य योगदान दे रही है ही साथ में राष्ट्र के विकास में भी अपना शीर्ष पद पर सेवायें दे कर देश के सही से निर्माणमें व विश्व पटल पर सेवायें देकर अपनी अलग पहचान क़ायम की है । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यालय में सेवाये हो याराष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , वितमंत्री आदि जैसे पद हो हर जगह कही न कही हम महिलाओं को देख सकते है । बालिकायें शिक्षा ग्रहण करआगे शादी के बाद  महिलाओं के रूप में पुरूषों के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चलती है । औरत:-और का अर्थ है :- आत्माबली , संकल्प पूरक । र का अर्थ है:- ऊर्जा वर्धक ।त का अर्थ है:- सरस्वती – स्वरुप। औरत शब्द में इतनी – इतनी विषेशताए होती है । इसअर्थ की सही से सार्थकता कब नजर आती है  जब एक मकान घर बन जाता है और घर एक मंदिर बन जाता है। भारतीय संस्कृति में नारीके सम्मान को हम ऐतिहासिक स्तर पर भी देख सकते है। जब में भारतीय संस्कृति की बात करता हूं तो जैन, बौद्ध, वैदिक सभी परंपराएंआ जाती है। जन्हा स्त्री की पूजा होती है वन्हा देवता रमण करते है, यह उदात स्वर भारतीय परंपरा का रहा है। जैन परंपरा की बात करेतो आदि पुरुष भगवान ऋषभ माता मरूदेवा का आदेश का कितना सम्मान करते थे वह उस घटना से पता लगता है जब युगल में उसका पुरुष साथी आश्चर्यजनक घटना में  उसकी जीवन यात्रा शेष हो जाती है और माता कहती है इसका विवाह ऋषभ के साथ कर दो। जैनपरम्परा उक्त घटना को विवाह संस्था का उदय मानती है। ऋषभ ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि कला और सुंदरी को गणित की कलासिखाई। 16 महासतियो का वर्णन जैन परम्परा में नारी जाति के प्रति अत्यंत सम्मान को दिखाता है। तीर्थंकर परंपरा में श्वेताबारसंप्रदाय 19 वे तीर्थंकर मल्लिनाथ को स्त्री को सर्वोच्च आध्यात्मिक पद देना स्वीकृत करता है। भगवान महावीर ने चंदनबाला का उद्धारकरके उनको 36000 साध्वियों की प्रमुख बनाया। विनोबा भावे के शब्दो में भगवान महावीर ने नारी जाति को जो अधिकार दिए वे कोईसाधारण नही थे। जो साहस महावीर ने दिखाया वह बुद्ध में नही दिखाई दिए। यह विनोबा जी का मानना है। तेरापंथ का गौरवशालीइतिहास देखे तो आचार्य भिक्षु के समय खंडित लड्डू को पूर्ण करने वाली तीन साध्वियों ने संवत 1821 में अपना साहस और शौर्यदिखाया। भिक्षु स्वामी ने उनको सचेत किया एक भी कालधर्म को प्राप्त हुई तो शेष दो को संलेखना का मार्ग अपनाना होगा। वे अडिगरही है । जयाचार्य ने साध्वी सरादरां जी को तैयार किया और प्रथम साध्वी प्रमूखा बनाया और नारी जाति का कितना सम्मान बढ़ाया।यह परंपरा गतिशील रही। नवम अधिशास्ता आचार्य तुलसी ने नारी की चेतना को विकसित करने में नए आयाम स्थापित किए। नयामोड़ आंदोलन से सुप्तता को मिटाया और विकास की नई उड़ान भरने का आकाश दिया। विकास मूल्यों के साथ हो यह उनकी विशेषप्रेरणा रही। पूर्व साध्वी प्रमुखा श्री कनक प्रभा जी आचार्य श्री तुलसी की कृति है । आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उनको शासन माता केगौरवमयी स्थान पर आसीन किया था । वर्तमान नवम् साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी को आचार्य श्री महाश्रमण जी ने नियुक्त कियाहै । महिलाओं में क्षमता भी होती है और अनेकों नैसर्गिक गुण भी। ममता, सहज वात्सलय, करुणा, पृथ्वी के समान सहिष्णुता, दृढ़संकल्प शक्ति भी विद्यमान रहते है। संस्कार निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशिष्ट होती है। नारी और नर एक गाड़ी के 2 पहियें हैं ।दोनो एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। दोनों की एकरूपता ही पूर्ण विकास है। नारी सद्गुणों की खान हैं । वहीं नर भी नारायण से किसी सेकम नहीं है । दोनों का युगल ही सृष्टि का सृजनहार है। यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमन्ते तत्र देवता । नारी के अंदर बसे नारित्व के गुणों काध्यान आता है| वात्सल्य, स्नेह, ममता, दया, करुणा, बलिदान, सहनशीलता, लज्जा, हिम्मत, शील आदि अनेक गुणों को आत्मसातकिया हे नारित्व ने| इन सारे गुणों को धारण करने वाली समस्त नारी जाति को मेरा नमन| — प्रदीप छाजेड़ 

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आधुनिकरण ने रिश्तों की मर्यादा ही ख़त्म कर दी

माना कि ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते इंसान को कुछ पल खुशियों के, हँसी मजाक के चाहिए होते है जिसका सोशल मीडिया बहुत सुंदर माध्यम है। सोशल मीडिया पर हमें सारी सामग्री मिल जाती है, अच्छी बात है। तो आज बात करते है लोगों को एंटरटेन करने वाले मिम्स और विडियोज़ की। आज तक सिर्फ़ […]

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आओ ईमानदारी को व्यक्तित्व रूपी आभूषण बनाएं

सृष्टि रचनाकर्ता ने सृष्टि में मानवीय जीव की रचना कर उसके मस्तिष्क में बौद्धिक क्षमता रूपी खान का ऐसा अणखुट खजाना भर दियाहै जिसमें अन्य 84 लाख़ योनियों को अलग रखा और यह जीव मानवीय योनि में जन्म लेकर अपने परिवार मोहल्ले समाज शहर के खूबसूरत माहौल में अपना बचपन बिताता है तो उसे हमारे […]

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विधवाएँ आज भी अभिशप्त क्यूँ

क्यूँ सिर्फ़ औरतों के लिए हर परंपरा, हर नियम-धर्म पालने की परंपरा सदियों से दोहराई जा रही है? कल एक पढ़े लिखे परिवार के बेटे की शादी में जाना हुआ, मैंने देखा सुंदर सजावट और रंग-बिरंगी कपड़ों में सज-धज कर आए मेहमानों के बीच लड़के की बुआ रजनी जो दो साल पहले चालीस साल की […]

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आज मानवीय जीवन प्रौद्योगिकी सुविधाओं का पंगु बन गया है

वैश्विक स्तरपर वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में सुविधाओं, सरलताओं, उपायों की ऐसी झड़ी लग गई है कि आज मानवीय जीवन इन सुविधाओं का पंगु बन गया है। स्थिति यहां तक हो गई है कि एक छोटे से केलकुलेटर, कंप्यूटर, वाहन जैसी सुविधाओं के बिना जीवन थम सा जाता है क्योंकि हम इसके आदि हो चुके हैं। […]

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क्यूँ न परंपरा को बदल दें

इंसान की मानसिकता बड़ी कम्माल होती है, कभी अपने भीतर झांकने की तस्दी तक नहीं लेते। खुद के भीतर असंख्य कमियों का दरिया भले बहता हो पर सामने वाले की सोच में, समाज की हर रिवायतों में और पूरी दुनिया की हर एक चीज़ में बदलाव की उम्मीद जरूर रखते है। कभी अपने दोषों का […]

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सामाजिक सरोकार

जीव मात्र सामाजिक प्राणी हैं,उन्हे साथ चाहिए ये बात पक्की हैं।उसमे चाहें कौए हो या चिड़िया सब अपनों के संग दिन में एक बार उड़ान भरते ही हैं,चिड़ियां सुबह के समय तो कौए शाम के समय आते हैं, बंदर झुंड में,चलती हैं गाएं भैंसें भी झुंड में।बकरी और भेड़ें भी तो एक साथ चलती हैं […]