कहानी

कलाकार

अख़बार खोला तो पहले ही पेज पर छपे एक विज्ञापन पर नज़र पड़ी। “फिरकी डांस ग्रुप” का विज्ञापन था। शहर में महीने भर से चल रही प्रदर्शनी में दो दिन बाद इनका शो होने वाला था। “फिरकी” शब्द पढ़कर दिमाग में कुछ चलने लगा। कुछ तो ऐसा था जो इस शब्द से जुड़ा था लेकिन […]

कहानी

लक्ष्मी घर आई

माधवी अपने जीवन से खुश थी। भगवान ने उसे प्यार करने वाला पति, माता पिता समान सास-ससुर और एक प्यारा सा बेटा दिया था। घर भी संपन्न था। बाहर से देखने पर उसके जीवन में सुख ही सुख नज़र आता था परंतु उसके मन में एक कसक थी। उसे बेटी चाहिए थी और वह दूसरी […]

कहानी

वसीयत

मनीष कबीर को लेकर घर आ गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कबीर ज़िद कर रहा था वापिस रिक्शा चलाने की लेकिन मनीष ने उसकी एक नहीं सुनी और अपने बंगले के अतिथि कक्ष में ले जाकर उसका सामान रख दिया। सामान के नाम पर भी एक छोटे से थैले में उसके एक जोड़ी […]

कविता

पापा की परी

सपने तब तक अपने थे पापा जब तक घर में थे। खुशियों से रिश्तेदारी थी जब तक पापा की प्यारी थी। शहर, गांव और मोहल्ला लुटाते थे स्नेह, नहीं था गीला। सबसे बड़ा धन था, पापा की तनख्वाह छोटी छोटी खुशियों को मिलती थी पनाह। दूर होकर भी रहते थे पास पापा सभी दोस्तों को […]

कहानी

परवरिश

आज सुबह जैसे ही सोकर उठा वृद्धाश्रम से फोन आया। जो सूचना मिली उसे सुनकर  मैं रोना चाहता था लेकिन रो नहीं पाया। बिना किसी को कुछ बताए मैं घर से निकल गया चाची को अंतिम प्रणाम करने। अंतिम संस्कार के बाद उनके कमरे में अकेला बैठा रहा कुछ देर। चाची से जुड़ी यादें दिमाग […]

कहानी

अंतर्मन

चीनू घर आई तो अलका ने राहत की सांस ली। वह किचन से बाहर लॉबी में आकर खड़ी हो गई। चीनू उसकी और देखे बिना अपने कमरे में चली गई। सुरेंद्र भी अब अंदर आ गए थे। काफी थके हुए दिख रहे थे। अलका ने पानी दिया तो पूरा गिलास पीकर उन्होंने सांस लिया। फिर […]

कहानी

प्यार का सफर

पंखुरी आज ऑफिस नहीं गई थी। कुछ अस्वस्थ महसूस कर रही थी। फिर से अक्टूबर का महीना आ गया था। मिला जुला मौसम। गर्मी ख़त्म नहीं हुई और सर्दी शुरू होने वाली है। पूरे साल में उसका प्रिय महीना होता था अक्टूबर का। लेकिन इस बार अक्टूबर का महीना शुरू होने पर वह उदास थी। […]

लघुकथा

सच्ची भक्ति

एक महान संत का प्रवचन होने वाला था। देखते ही देखते पंडाल लोगों से पूरी तरह भर गया। लोगों को बैठने की जगह नहीं मिल पा रही थी लेकिन लोग आते जा रहे थे। आयोजकों ने बैठे हुए लोगों के पीछे, आने वाले लोगों को खड़ा करना शुरू कर दिया। संत को प्रवचन शुरू करने […]

कहानी

गुरु दक्षिणा

सुचित्रा बहुत विचलित हो गई थी। उसने इतना अपमान अब तक कभी नही सहा था। भलाई करने का आज के जमाने में यह परिणाम मिलता है, उसे आज महसूस हुआ था। पड़ोस के घर से संयम उसके पास संगीत सीखने आता था। जबसे वह पड़ोस में रहने आया था तभी से उसके पास आ रहा […]

कविता

एक राह बनाएं

चलो गांव से शहर तक एक दौड़ लगाएं। जो जीत जाए, उसे गांव में रहना नसीब हो जाए। भौतिक सुख की लालसा में गंवाया है बहुत कुछ। बसे शहरों में जाकर, छोड़ गांव में सब कुछ। शहर लुभाता रहा गांव उजड़ता रहा। पोते पोती से मिलने को दादा तरसता रहा। ऐसी कोई राह बनाएं। दादा […]