कुण्डलिया छंद
कैसा इनका हाल, आप हम सब ही जानें।बात अलग है और, नहीं सरकारें मानें।।नहीं सरकारें मानें, राम कहानी इनकी।भरते सबका
Read Moreकैसा इनका हाल, आप हम सब ही जानें।बात अलग है और, नहीं सरकारें मानें।।नहीं सरकारें मानें, राम कहानी इनकी।भरते सबका
Read Moreअमरित हिय धारा, जीवन तारा, नेह फुलोरा, सुख दाता।। ईश्वर प्रतिरूपा, शक्ति स्वरूपा, छत्र अनूपा, प्रिय माता।। आँचल शुचि छाया,
Read Moreममता तेरी चाल पर, सारी दुनिया दंगफूट-फूटकर रो रहा, गिरगिट वाला रंगगिरगिट वाला रंग, लगें पप्पू घाटे मेंटीपू,चारा चोर, केजरी
Read Moreखिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में। सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।। महके चहके बाग, छाँव हो
Read Moreदान धर्म श्रेष्ठ कर्म, प्रीत पुष्प नेह मर्म, दंभ द्वेष हो न दर्प, धीर धैर्य धारिए।। रिद्धि सिद्धि बुद्धिमान, आन
Read Moreकुंडलियां छंद उलझे मन की डोर जब, हिय में हो संग्राम। योग ध्यान से ही सखा, मन पर कसे लगाम।।
Read Moreयोगी से ले लीजिए, बुलडोजर श्रीमानसरमा जी से लीजिए,चुन-चुन खनक बयानचुन-चुन खनक बयान,मरें सारे खल-कामीयूसीसी ले आव, लगाए जैसा धामीकह
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