कुण्डली
भारत में महंगा नहीं, होते क्यों पिटरोलजोह-जोह कर थक गए, आज विपक्षी ट्रोलआज विपक्षी ट्रोल, उधर ममता पगलाईआखिर घर की
Read Moreभोर लालिमा प्रभास, चेतना विभा उजास, ज्योति रश्मियां प्रकाश, ओस बूँद भीजिए।। धर्म कर्म प्रेम सेतु, धैर्य धार ज्ञान हेतु,
Read Moreमौसम मदमाया हुआ, उड़े अबीर-गुलालबिना मले ही गाल भै,चर तरुणी के लालचर तरुणी के लाल, ताल दइ बुढ़वा नाचेंकलियन देख
Read Moreनेता अभिनेता जान, साथी कभी मत मान, वादों की हैं भरमार, हैं ये मायावी संसार।। लोभ लालच रूदन, अहं स्वार्थ
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