हरा-भरा हो गाँव
खिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में।
सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।।
महके चहके बाग, छाँव हो नेहिल शीतल।
हरा-भरा हो गाँव, ठाँव हो प्रेमिल निर्मल। ।
खिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में।
सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।।
महके चहके बाग, छाँव हो नेहिल शीतल।
हरा-भरा हो गाँव, ठाँव हो प्रेमिल निर्मल। ।