कुण्डली/छंद

हरा-भरा हो गाँव

खिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में।

सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।।

महके चहके बाग, छाँव हो नेहिल शीतल।

हरा-भरा हो गाँव, ठाँव हो प्रेमिल निर्मल। ।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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