कुण्डली/छंद

कलाधर घनाक्षरी

दान धर्म श्रेष्ठ कर्म, 

प्रीत पुष्प नेह मर्म, 

दंभ द्वेष हो न दर्प, 

धीर धैर्य धारिए।।

रिद्धि सिद्धि बुद्धिमान, 

आन बान शान जान,

पंख खोल ले उड़ान, 

कीर्ति पाथ जानिए।।

तोल मोल शब्द बोल, 

माधुरी सुमीत घोल,

एक साज गीत राग,

ताल गूँज साधिए।।

स्वास्थ्य का विशेष ध्यान, 

हो विशुद्ध खान-पान, 

योग से निरोग मान, 

मुक्ति मार्ग मानिए।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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