कविता
स्मृतियाँ जीवित रहती हैं सदामन के किसी कोने में यादें बनकरअमृत की चाह में सदैव अश्रुबहकर सूख जाया करते हैंपतझड़
Read Moreभावना को समझने के लिए मन चाहिए,दुखों को समझने के लिए अपनापन चाहिए।ईश्वर को समझने के लिए श्रद्धा चाहिए,और इंसान
Read Moreआग की भट्टी मेंदही पका रहे हैं घर में आग लगी हैरसमलाई खा रहे हैं बाप बेटे पर तीर चला
Read Moreराजापुर की धरा से उपजा, एक अनूठा रत्न महान।तुलसीदास नाम था जिनका, किया रामयश का गुगान ।बचपन कठिन रहा जीवन
Read Moreजंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन की आड़ मेंक्या कुछ नहीं हो रहा है,सत्ता की राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैंसंवैधानिक पदों
Read Moreगद्दी पर जो बैठा है,वो केवल एक मुखौटा है,असली खेल तो कहीं दूर,उस तोते ने ही ओटा है,किस्सों का जादूगर
Read Moreरोज झुक जाता हूंमैं शिव के आगेमांग लेता हूंहर दुआ में तुम को। ना मांग पाऊंअगर कभी तुमकोतो मांग लेता
Read Moreप्रेमचंद थे कलम के धनी , जन-मन के थे सच्चे प्राण।शब्द-शब्द से भारत माँ का, किया जिन्होंने गौरव गान।होरी, धनिया,
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