मौत
जीवन पर तो बहुतों ने लिखा पर मृत्यु पर लिखने में किया संकोच जीवन तो एक ही बार मिला पर
Read Moreकभी व्यवस्था पर है प्रश्न उठाते,कभी संविधान की बात सुनाते।लेकिन जब “अवसर” मिलता है,वे तभी वादों को भूल भी जाते।
Read Moreतुम बिन सूना मन का आँगन,बन जाओ झंकार सखे !साँसें तुमको ढूँढ रही हैं,कर लो अब स्वीकार सखे ! मौन
Read Moreथाली में पकवान सजे हैं, आँखें टीवी पर अटकी,निवाला मुँह तक आता है, सुध-बुध कहीं भटकी।कभी समाचार-धारावाहिक, मूवी का शोर
Read Moreजिस थाने में सुरक्षा की उम्मीद ले आई,वहीं इंसानियत शर्मसार करने हो आई।जिस वर्दी पर विश्वास जताया था उसने,उसी ‘वर्दी’
Read Moreआगे पीछे खड़ी है यहाँ मौत ।बारूद बन गई जीवन की सौत ॥कहाँ पे ले जा रहा है ये जमाना
Read Moreसमय बड़ी जल्दीउम्रदराज़ हो जाता है।भोर में वह किसी नवजातस्वप्न की तरह आँखें खोलता हैकोमल, कमसिन,ओस मेंभीगी कच्ची कली-सा। फिर
Read Moreआज गली-गली दीपों की पंक्ति सजी है,आँगन में फिर खुशियों की धून बजी है ;लेकिन मन के सूने कोने में
Read Moreअभी मैं बिस्तर पर जाने की सोच ही रहा थाकि दुश्मन की तरह दुश्मन की तरहमित्र यमराज आ गए आ
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