मैं पानी हूं
मैं पानी हूं
जीवन की कहानी हूं
बादल का भाग्य
समुद्र की गहराई हूं
गंगा की पवित्रता
आंखों की तराई हूं ।
मैं पानी हूं
बूंद – बूंद स्वरूप हूं
यमुना का प्रेम
झरनों का संगीत हूं
हर कंठ की प्यास
धरती का अस्तित्व हूं ।
मैं पानी हूं
जन्म- मरण की कहानी हूं
आरंभ- अंत जो लिखा
वो अमर स्याही हूं
विनाश – सृजन का रूप
मैं पानी हूं…
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
