मुक्तक
चालाक लोमड़ी धूर्त भेडिये, जब जंगल में सरकार बनायेंगे,हिरणी से बलात्कार आरोप, ख़रगोशों पर लगाये जायेंगे।बचे शिकार पर पलने वाले,
Read Moreरोटी की मजबूरियाँ, छीन गई पहचान,बचपन बोझा ढो रहा, सूना हर अरमान॥ हाथों में गर कलम हो, लिखते नए विचार,आज
Read Moreदोषारोपण कर रहे, अब अपने ही लोग।तेजी से है बढ़ रहा, कोरोना जस रोग।दोषी भी हम आप हैं, देख रहे
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