दोहा
राह में कांटे बिछा दे, देख फिर तू हौंसला,तोड़ चाहें घर गिरा दे, देख फिर तू हौंसला || आंधियों से,
Read More॥दोहा॥ ममता सागर रूप तू, करुणा की पहचान।माँ तेरे चरणों में बसे, मेरा सारा मान॥तन-मन-धन सब वार दूँ, तुझ पर
Read Moreगिरती मकड़ी डोर से, जब तक उलझे तार।जिजीविषा नित देखिये, माने कभी न हार।।तिनका चुन चुन चोंच में, मूक हृदय
Read Moreसूरज आतिश बन गया, तपे नगर सब गाँव ।जीवों में अकुलाहटें, ढूंढ रहे सब छाँव ।।(१) लू चलती है गति
Read Moreमन में भरकर प्रीत तुम,कैसे रखते धीर ?सुन ओ मेरे रांझिया,व्याकुल तेरी हीर ।। श्वास श्वास में तुम बसे,तुम ही
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