देत जीत को मात
कर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद। कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।। कर्ता को ना चाह है,
Read Moreकर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद। कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।। कर्ता को ना चाह है,
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥
Read Moreहमने जिसको अपना समझा, विश्वास जताया,लूट रहे अपनों को अपने, देख कर मन घबराया।जिन लोगों से बात करी थी, सबसे
Read More१नन्ही-नन्ही आँख में,सपनों का संसार।टैब संग सीख रहा,उज्ज्वल हो व्यवहार॥२मन लगाकर देखता,नई-नई हर बात।खेल-खेल में सीखता,जीवन की सौगात॥३जिज्ञासा की रोशनी,चमके
Read Moreसबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर।हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥ धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी
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