दोहा
राह में कांटे बिछा दे, देख फिर तू हौंसला,
तोड़ चाहें घर गिरा दे, देख फिर तू हौंसला ||
आंधियों से, बारिशों से डर नहीं लगता हमें,
खूब तूफां छत उड़ा दे, देख फिर तू हौंसला
डूबती कश्ती किनारे पर लगानी सीख ली,
छेद कश्ती में बना दे, देख फिर तू हौंसला ||
मंजिलों को ढूंढना है रोशनी चाहे न हो,
राह के दीपक बुझा दे, देख फिर तू हौंसला ||
भूमि हो बंजर यदि, तो भी उगा देंगे तरू,
फावड़ा,खुर्पी दिला दे, देख फिर तू हौंसला
— शालिनी शर्मा
