चौपाई छंद
कागज स्याही प्रेम जताएँ। नैना झर-झर झरते जाएँ। विरहन मन में प्रीत हुलारे। चिठ्ठी में जड़ दूँ वे सारे।। प्रियतम
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreधर्म नहीं बाज़ार है, श्रद्धा ज्यों व्यापार।लोभी जहाँ प्रधान हो, सूना हर दरबार॥ धर्म बना व्यवसाय जब, खो बैठा संस्कार।भूखे
Read Moreइसमें किसी को भी संदेह नहीं है, कि जब भी कभी साहित्य की चर्चाओं में, कहानियों के बारे में कभी
Read Moreइस आंदोलन का पेपर लीक से कोई लेना देना नहीं है न छात्रों से न युवाओं के रोज़गार से ये
Read Moreजो ज़ख़्म दिल को मिले, हम छुपाए बैठे हैं,ज़ीस्त अपनी तमाम महफ़िलमें लुटाए बैठे हैं। वो आ के पूछ रहे
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