पुस्तक समीक्षा

                मिजोरम : आदिवासी और लोक साहित्य

डॉ जगन्नाथ पंडित डॉ वीरेंद्र परमार का लेखन मूलत हिंदी भाषा और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के आदिवासी समुदाय, उनकी

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पुस्तक समीक्षा

दलाली का सुख : व्यवस्था की पतन गाथा

रूपसिंह चन्देल वीरेन्द्र परमार बहु-विधा रचनाकार हैं. उत्तर-पूर्व भारत पर अब तक उनकी चौबीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं I

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पुस्तक समीक्षा

जीवन का रंगमंच : महान अभिनेता अमरीश पुरी की प्रेरणादायक आत्मकथा

अपने संघर्ष, समर्पण और प्रतिभा के बल पर हिंदी फिल्मों में खलनायकी के पर्याय बन चुके महान अभिनेता अमरीश पुरी

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समाचार

किरदार अभी जिंदा है” कहानी संग्रह का हुआ भव्य लोकार्पण

गाजियाबाद से पधारी जानी मानी लेखिका एवं साहित्यकार श्रीमती लेखा वर्मा के संपादन में विभिन्न लेखकों द्वारा रचित कहानी संग्रह

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शिक्षा एवं व्यवसाय

रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉलों पर पसरा सन्नाटा: क्या इंटरनेट युग ने छीन ली पढ़ने की संस्कृति?

भारतीय रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आवागमन के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि वे लंबे समय तक देश की सांस्कृतिक

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शिक्षा एवं व्यवसाय

शिक्षा पर पहरा नहीं, समान अवसर का सवेरा चाहिए

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक समृद्धि, ऊँची इमारतों या आधुनिक तकनीक से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस

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हाइकु/सेदोका

शाश्वत की सुगंध

ओस की बूँद,भोर मुस्काए,सुगंध अमर। वन की साँस,पत्ते गुनगुन,जीवन जागे। नभ निर्मल,चिड़िया का स्वर,मन महके। शांत सरिता,लहरें बोलें,काल ठहरे। फूल

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राजनीति

केन की धारा में बहता एक सवाल : क्या इंसान भी विकास का हिस्सा है?

विकास तभी सार्थक है, जब उसकी कीमत किसी की पहचान, आजीविका और अस्तित्व न बने। आज भारत इसी प्रश्न के

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