व्यंग्य लेख – आजादी मिली थी, गुलामी हमने खुद चुन ली
कमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब
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Read Moreकभी सलोना ख्वाब जब, जाता यूँ ही टूट।मन का पंछी मौन हो, जाता पल में रूठ॥ आसों के पंखों तले,
Read Moreमात्र महाभारत नहीं, युद्धों का इतिहास।सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश॥ कर्ण-शकुनि की चाल ने, बढ़ाया मन में द्वेष।दुर्योधन के हठ
Read Moreबारिश में पापा संग,निकला नन्हा लाल।बूँदें बरसीं झमाझम,मौसम हुआ कमाल॥ खिड़की से बाहर दिखे,पेड़ न्यारे-न्यारे।बादल नभ में घूमते,लगते कितने प्यारे॥
Read Moreछपे हुए पन्ने एक किताब से बढ़कर कुछ नहीं होते। ये लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ, कल्पना और वर्षों की
Read Moreकूड़े का कोई टुकड़ा सिर्फ कूड़ा नहीं, खासकर जब वह अस्पताल से निकला हो। उसे जमीन में दबाने से खतरा
Read Moreकभी मौका मिले तो चुगली करके देखिए कितना सकून मिलता है। हृदय तरोताजा हो जाता है जैसे-अभी अनार का जूस
Read Moreभारत जब अपनी स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है, तब यह केवल एक ऐतिहासिक राजनीतिक
Read Moreजंतर-मंतर के लिए,लगे रहे दिन रातझारखण्ड के लिए वे, करें न कोई बातकरें न कोई बात, गजब की है बेशर्मीअब
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