मयूरा
रे मयूरा !नाच के दिखा lक्यों है खड़ा तू परेशान सा? रे मानव!नाचूँ मैं कैसे?ना जंगल, ना बदराना हरियाली, ना
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read Moreआओ हम सब मिल कर,अपनी धरती को स्वर्ग बनायें,हरियाली खेतों में छाये,यहाँ फूलों से उपवन महकाएं,गौ माता की पूजा करके
Read Moreचलो प्रकृति से नजदीकियां बढ़ाएंएक हाथ निःस्वार्थ दोस्ती का बढ़ाएंबनावटी पन सब दूर हो जाएगाजीवन का मर्म समझ में आएगा
Read Moreबिहार के पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका देश भर में प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की उम्मीदों का
Read Moreकिस्मत के हारे हमलो कहां आ गए हमएक मुश्किल रास्ते को पार किए हमदूसरे मुश्किल रास्ते पर फिर आ गए
Read Moreशाम ढल रही थी, और रेलवे स्टेशन के पुराने पीपल के पेड़ पर परिंदों का शोर धीरे-धीरे थम रहा था।
Read Moreबच्चों को खुलकर खिलखिलाने दो,उनमें “आनंद” भाव जमकर रमने दो,दौड़ता-कूदता, उछलता-खेलता,मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है । बारिश की बूॅंदों संग
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