कविता

बच्चोँ क़ो मारें नहीं, प्यार से सँवारें

शरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख

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