मृतात्माएँ भी करती हैं दीपावली का इंतजार !
वागड़ की अनूठी लोकपरंपरा ‘दीवड़ा’, दीपावली का पर्व केवल जीवित मनुष्यों के उल्लास, उमंग और उत्सव का अवसर नहीं है।
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Read Moreत्योहार आते ही बाजार में रौनक बढ़ जाती है। मिठाई की दुकानों पर ऐसी सजावट होती है, मानो मिठाइयां नहीं,
Read Moreदीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और अधर्म पर धर्म की
Read Moreकल खो दिया हमने आज के लिएआज खो दिया हमने कल के लिएआज की खुशी भी गंवा दी हमनेचैन फिर
Read Moreमनुष्य की स्वाभाविक आकांक्षाओं में सुंदर दिखने की चाहत का अपना विशिष्ट स्थान है। आकर्षक व्यक्तित्व, सुघड़ वेशभूषा और सौम्य
Read Moreचांदपुर गांव का वह कच्चा मकान, जिसकी छत हर बरसात में टपकती थी, दो उम्मीदों के सहारे टिका हुआ था।
Read Moreएक पिता सड़क पर हाथ जोड़कर रास्ता मांगता रहा और एंबुलेंस में उसका बेटा जिंदगी की आखिरी सांसें गिनता रहा।
Read Moreदिवाली की रात कहीं खुशियों के धमाके गूँजते हैं, तो कहीं यही गूँज खौफ बन जाती है। आसमान में फूटता
Read More“त्योहार अब सिर्फ़ रस्म नहीं, रिश्तों की परीक्षा बनते जा रहे हैं — सवाल यह है कि क्या हमारे दिलों
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