पद पाने के लिए समाजसेवा का बढ़ता ड्रामा
समाजसेवा कभी निस्वार्थ भाव से समाज के दुख-दर्द बांटने, जरूरतमंदों की मदद करने और सामाजिक बदलाव लाने का माध्यम हुआ
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Read Moreदीपावली प्रकाश, उल्लास और सकारात्मकता का पर्व है। यह त्योहार हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की
Read Moreत्यौहार आते हैं आते ही चले जाते हैं इंतज़ार जरूर होता है उनका पर आने पर वो ख़ुशी नहीं होती
Read Moreआखिर क्या होता है, जब करोड़ों भारतीय एक साथ जश्न मनाने निकल पड़ते हैं? बाजार सज जाते हैं, दुकानों पर
Read Moreक्या डोनाल्ड ट्रंप को आखिरकार जनता ने आईना दिखा दिया? क्या दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति को भी वोटरों के
Read Moreपर्व-त्योहार केवल तिथियों और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते। वे जीवन में उल्लास के रंग भरते हैं, रिश्तों में
Read Moreपूछ रही है धरती माता।आखिर तुमको क्या है आता।।बेशर्मी से जीना सीखे।अंधे बहरे नाहक चीखे।। मर्यादा को निशदिन तोड़ो।जीवन अपना
Read Moreयुग ने हम सबको अपना गुलाम बना लिया है,हमारी भावनाएं, सभ्यता, संस्कार, संवेदनाएं और मानवीय मूल्यों को छीन करहमें अपने
Read Moreआइए हम सब मिलकर इतनी तो जिम्मेदारी उठाएँकम से कम एक दिया अपने फौजियों के नाम जलाएं,जिनके कारण हम और
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