मेरा और तुम्हारा मन
एक नदी के दो तटसागर में मिल खुल जायें पटहृदय दो, एक हो धड़कन।मेरा और तुम्हारा मन।। कदम- कदम हो
Read Moreएक नदी के दो तटसागर में मिल खुल जायें पटहृदय दो, एक हो धड़कन।मेरा और तुम्हारा मन।। कदम- कदम हो
Read Moreहर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस हमारे संवैधानिक इतिहास, भाषायी विविधता और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा
Read Moreभाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की संस्कृति, परंपरा, संवेदना और सामूहिक चेतना
Read Moreकरते केवल कर्म हैं, नहीं चाहिए ताज। कल की चिंता ना करें, जीते हैं बस आज।। जीवन खुली किताब है,
Read Moreहिंदी से हमारा रिश्ता भी बड़ा अजीब है—साल में एक दिन प्रेम उमड़ता है और बाकी दिन सुविधा जीत जाती
Read Moreवैश्विक स्तरपर इक्कीसवीं सदी का डिजिटल युग सूचनाओं की अभूतपूर्व शक्ति लेकर आया है।इंटरनेट सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स ने
Read Moreवैश्विक स्तरपर पूरी दुनियां में भारत ही एक ऐसा देश है जहां रिश्तोंनातों की बहुत गहराई से कद्र होती है,
Read Moreविस्तार हुआ अब ज़रूरत है, आधार बनाने की,बिखरी हुई हरेक शक्ति को फिर, साथ लाने की।“ब्रिक्स” देशों का समूह नहीं,
Read Moreहिंदी दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव बनकर न रह जाए, बल्कि हिंदी हमारी चेतना, व्यवहार और जीवन का स्थायी हिस्सा
Read Moreपहाड़ों में जीने के लिए पहाड़ होना पड़ता है। जिस तरह पहाड़ धूप- छांव को सहते हुए हमेशा अपनी पीठ
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