व्यंग्य – देवासुर संग्राम
इस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न
Read Moreइस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न
Read Moreपों – पों पीं – पीं करती लारी।ट्रक कारों के वाहन भारी।। नहीं चैन से रहने देते।कान फोड़ते वाहन जेते।।शोर
Read Moreछरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम
Read Moreदेख तरक्की देश की, फन फैलाए व्याल।अवसर देखें छद्म से, बने हुए हैं काल।। कुटिल दृष्टि है गीध की, कॉकरोच
Read Moreकमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब
Read Moreकभी सलोना ख्वाब जब, जाता यूँ ही टूट।मन का पंछी मौन हो, जाता पल में रूठ॥ आसों के पंखों तले,
Read Moreमात्र महाभारत नहीं, युद्धों का इतिहास।सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश॥ कर्ण-शकुनि की चाल ने, बढ़ाया मन में द्वेष।दुर्योधन के हठ
Read Moreबारिश में पापा संग,निकला नन्हा लाल।बूँदें बरसीं झमाझम,मौसम हुआ कमाल॥ खिड़की से बाहर दिखे,पेड़ न्यारे-न्यारे।बादल नभ में घूमते,लगते कितने प्यारे॥
Read Moreछपे हुए पन्ने एक किताब से बढ़कर कुछ नहीं होते। ये लेखक के विचार, अनुभव, भावनाएँ, कल्पना और वर्षों की
Read Moreकूड़े का कोई टुकड़ा सिर्फ कूड़ा नहीं, खासकर जब वह अस्पताल से निकला हो। उसे जमीन में दबाने से खतरा
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