बाला छंद
लेखनी सत्य झंकार साथी। लेखनी नेह शृंगार साथी।। निर्भया हिम्मती सार्थकी हो। दुर्जनों सी नहीं पातकी हो।। वर्तनी गैर है
Read Moreशाम का वक्त था, कमरे में मद्धम रोशनी जल रही थी। मेज़ पर अबू की पुरानी डायरी रखी थी, जिसके
Read Moreसत्य सदा निर्भीक है, झेले लाख प्रहार।झूठ महल-सा ढह पड़े, आते ही उजियार॥ कर्म बिना मिलता नहीं, जीवन में सम्मान।मेहनत
Read Moreउत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार।गढें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार।। वाणी में गुरुदेव की, होता प्रभु का
Read Moreमेरी कॉलोनी में रहने वाले एक वृद्ध की दिनचर्या वर्षों से नहीं बदली थी। हर शाम वह चारपाई पर बैठकर
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