गीत/नवगीत

छरर -छरर छर बरसें

छरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम

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हास्य व्यंग्य

व्यंग्य लेख – आजादी मिली थी, गुलामी हमने खुद चुन ली

कमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब

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मुक्तक/दोहा

सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश

मात्र महाभारत नहीं, युद्धों का इतिहास।सलाहकार हो बुरे, करते कुल-विनाश॥ कर्ण-शकुनि की चाल ने, बढ़ाया मन में द्वेष।दुर्योधन के हठ

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कविता

बाल कविता : बारिश में सफर

बारिश में पापा संग,निकला नन्हा लाल।बूँदें बरसीं झमाझम,मौसम हुआ कमाल॥ खिड़की से बाहर दिखे,पेड़ न्यारे-न्यारे।बादल नभ में घूमते,लगते कितने प्यारे॥

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पर्यावरण

इलाज के बाद बची बीमारी : अस्पतालों के नीचे दफन होता भविष्य

कूड़े का कोई टुकड़ा सिर्फ कूड़ा नहीं, खासकर जब वह अस्पताल से निकला हो। उसे जमीन में दबाने से खतरा

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