पिज़्ज़ा और बर्गर की लड़ाई
एक बार सुबह-सुबहपिज़्ज़ा, बर्गर में हुई लड़ाई पिज़्ज़ा बोला–मुझको जो खाता है,वह मेरा गुण गाता है। बर्गर तुनककर बोला–तुझसे ज्यादा
Read Moreएक बार सुबह-सुबहपिज़्ज़ा, बर्गर में हुई लड़ाई पिज़्ज़ा बोला–मुझको जो खाता है,वह मेरा गुण गाता है। बर्गर तुनककर बोला–तुझसे ज्यादा
Read Moreबसंती हवा चली हैझूम के चली है।गीत गाकर चली है,खिलखिलाकर चली है। खेतों से होकर,बागों से मिलकर।गलियों में चली है,फूलों
Read Moreहिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की यात्रा केवल समाचारों के प्रसार की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज, विचार और तकनीकी
Read Moreकिस क़दर टूटा हूँ, तुमको क्या बताऊँ,जिस्म छलनी छलनी, तुमको कैसे बताऊँ? जबसे दी तुमने क़सम भूलने की,दिया था वास्ता
Read Moreतुम सहज प्रकृति होजीने की महज़ आकृति हो हिमालय की गोद से मचलती मस्त पवन निर्मल ।नभ के गर्भ से
Read Moreमै बरसों से लिख रही हूँमगर अभी तक मुझे,वो नही मिला जिसकीकब से तलाश है? रह – रहकर मै खुद
Read Moreधूप में तपकरसीखा है जीवनरास्ता अपना काँटों की चुभनमुस्कान सिखातीसहना हरदम गिरकर संभलनाहर हार के बादजीत का स्वाद वक़्त की
Read Moreअलमारी के सबसे पिछले हिस्से में, कपड़ों की तहों के नीचे दबे वो चंद नोट महज़ कागज़ के टुकड़े नहीं
Read Moreवक्त बदलता दे रहा, कैसे-कैसे घाव,माली बाग़ उजाड़ते, मांझी खोए नाव॥ अपनों से अपने नहीं, रखते आज लगाव,रिश्तों की हर
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