कलियुग का महत्व
अक्सर लोग कहते रहते हैं- “अरे भाई घोर कलियुग है”। जहाँ कहीं कोई अनियमितता देखी रोने लगते हैं- “कलियुग में
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Read Moreजब-जब घर की याद आती वह विह्वल हो वृद्धाश्रम से दूर घूमने निकल जाते थे । आज भी सुबह-सुबह घूमते-घूमते
Read Moreवक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियेंदर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर जाता है जीने का नजरिया तो,
Read Moreकुछ घटनाएं सिर्फ खबर नहीं होतीं, बल्कि समाज के सामने एक आईना बनकर खड़ी हो जाती हैं। हरियाणा के सोनीपत
Read Moreवैश्विक स्तरपर आज हर देश पर्यावरण समस्याओं का सामना कर रहा है जिसका समाधान खोजने उसपर अमल करने के लिए
Read Moreसमाज की पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था या आधुनिक तकनीक से नहीं होती। किसी भी सभ्यता का
Read Moreधन-दौलत के मोह से, रहता मैं हूँ दूर।प्रेम भरा व्यवहार ही, मुझको है मंज़ूर॥ धन से ऊँचा मान है, ऊँचा
Read More“गाँव की हर चीज़ चाहिए, लेकिन गाँव नहीं चाहिए।” यह एक साधारण-सा वाक्य नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज की बदलती
Read Moreचेहरे भोले ओढ़कर, रखते मन में दाँव।भेड़ों में कुछ भेड़िये, घुसकर देते घाव॥ भेड़ों जैसे बीच में, छिपा हुआ शैतान।मौका
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