बोझ
दिल का बोझ हल्का करनेरोना चाहता हूं आज जी भरकरदर्द जो सीने में छुपा हैखत्म हो जाए यूं धीरे बहकर
Read Moreपलकों में जो छुपा हुआ था,वह पैगाम सुनहरा है।आज खुला है राज हृदय का,रंग यह बेहद गहरा है।अधरों का वह
Read Moreविज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ और संभावनाएँ प्रदान की हैं। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने उन दंपतियों के
Read Moreपृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे काँच के विशाल गुंबद में सुरक्षित रखा गया था। दुनिया भर के
Read Moreतुम्हारे सहे हुए उत्पीड़न का दर्द,जो तुमने कभी नहीं लिखा,उसकी सज़ा तुम्हारी औलादेंक्यों और कब तक भुगतें? काश! तुमने उसे
Read Moreकहिये मेघों से जरा, ना बरसे घनघोर,नदी उफनती बह रही, साजन हैं उस छोर। गरज रहे हैं बादरा, आंधी का
Read Moreराजनीति में ऐसे क्षण विरले आते हैं, जब कोई वाक्य भाषण की सीमा लांघकर राष्ट्रीय विमर्श का दर्पण बन जाता है। दावों
Read Moreभारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वैचारिक चेतना और सशस्त्र क्रांति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है
Read Moreबड़े साहब का अचानक विभागीय दौरा आ गया, पूरे विभाग में भगदड़ मच गई। कोई फाइल लेकर इधर से उधर
Read Moreसर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’
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