पर्यावरण

उल्लुओं की सुरक्षा,संरक्षण आहार,और रहने की व्यवस्था हो

जंगलों, खंडहरों में ज्यादातर रात के समय उल्लू को देखा जा सकता है। वैसे भी उल्लू की प्रजातियां कम होती

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सामाजिक

मानवीय मूल्यों का क्षरण: आत्ममंथन, संवाद और सुधार की आवश्यकता

मानवीय जीवन की वास्तविक खूबसूरती केवल भौतिक उपलब्धियों, ऊँचे पदों, धन-दौलत और आधुनिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि उन मानवीय मूल्यों

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भाषा-साहित्य

एक बोली नहीं — निमाड़ की सदियों पुरानी साँस है निमाड़ी

प्रसंगवश – 19 सितंबर : निमाड़ी दिवस भाषा तब नहीं मरती जब उसके शब्द चुक जाते हैं; वह तब सूखने

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कविता

हमारी मातृभाषा की महिमा अपरंपार है

हिंदी हैं,हम, हम वतन है हिंदुस्तां हमारा है,महक रहा विश्व भर में गान ये हमारा है।हमारी मातृभाषा की महिमा अपरंपार

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स्वास्थ्य

मरीज ग्राहक नहीं, कैदी है — अस्पताल में विकल्पहीनता का सच

अस्पताल के दरवाजे तक आदमी बीमारी लेकर पहुंचता है, लेकिन लौटते समय अक्सर भारी बिल का बोझ साथ होता है।

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