ग़ज़ल
सब मयस्सर हो जिसको घर बैठे ।।काहिली क्यों न उसके सर बैठे ।। मन की संवेदना हो तब जाग्रतबात का
Read Moreदि ग्राम टूडे प्रकाशन समूह द्वारा समीर द्विवेदी नितान्त को हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए ‘टीजीटी
Read Moreहो आंग्ल वर्ष भी मंगलमय ।।अपना है चैत्र प्रतिपदा समय ।।चलना है वक्त के साथ साथ,,,जारी हैं व्यवस्थाएं यह द्वय
Read Moreजीवन की हर आहुती, डाली जिसके नाम ।वही कहे इस यज्ञ में, नहीं तुम्हारा काम । मेरे ही पदचिन्ह पर,
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