बाल साहित्य

बाल कविता

आँगन की क्रिकेट

नन्हे हाथों में बल्ला है,आँखों में अरमान।आँगन ही बन गया आज,सपनों का मैदान॥ हँसी-ठिठोली, दौड़-भाग,मस्ती की भरमार।जीत-हार से दूर हैं,प्यारा

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