रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉलों पर पसरा सन्नाटा: क्या इंटरनेट युग ने छीन ली पढ़ने की संस्कृति?
भारतीय रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आवागमन के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि वे लंबे समय तक देश की सांस्कृतिक
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Read Moreभारत के शहर तेजी से बदल रहे हैं। चौड़ी सड़कों, ऊँचे फ्लाईओवरों, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो नेटवर्क और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को
Read Moreजल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, सभ्यता, आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। मानव
Read Moreनाम-पता सब देह के, जग के मात्र निशान।आत्मा का परिचय कहाँ, लिख पाए इंसान॥ मोबाइल, घर, गाँव सब, बदलें दिन
Read Moreकिसी भी देश की कानून-व्यवस्था का सबसे दृश्यमान चेहरा पुलिस होती है। जब कोई अपराध होता है, दुर्घटना घटती है,
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥
Read Moreजंजीरें यदि न कट सकें, बदलो अपनी चाल।लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ बंधन चाहे लाख हों, मत खोना विश्वास।हिम्मत
Read Moreघर-आँगन की छाँव में, पलते प्रेम-विचार।लोभ लगा जब मन कहीं, टूटे सब परिवार॥ माटी केवल खेत की, नहीं हृदय का
Read Moreहरियाणा में सामने आए 661 करोड़ रुपये के कथित आईडीएफसी बैंक प्रकरण ने केवल एक वित्तीय अनियमितता के आरोपों को
Read Moreकोई यहाँ कबीर है, लगता कोई मीर।भीतर-भीतर है छुपी, सबके कोई पीर।। हँसते चेहरों के तले, दर्दों की जागीर।बाहर सावन-सा
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