Author: *डॉ. सत्यवान सौरभ

शिक्षा एवं व्यवसाय

रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉलों पर पसरा सन्नाटा: क्या इंटरनेट युग ने छीन ली पढ़ने की संस्कृति?

भारतीय रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आवागमन के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि वे लंबे समय तक देश की सांस्कृतिक

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सामाजिक

शहरों में पैदल चलने का अधिकार या संघर्ष? 

भारत के शहर तेजी से बदल रहे हैं। चौड़ी सड़कों, ऊँचे फ्लाईओवरों, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो नेटवर्क और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को

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पर्यावरण

सूखती धरती, बढ़ती प्यास : जल दिवालियापन की ओर बढ़ता भारत

जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, सभ्यता, आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। मानव

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मुक्तक/दोहा

मस्ती की टोली

नन्हे-नन्हे पाँव में,चंचलता की धूप।घर-आँगन महका उठे,हँसी बने स्वरूप॥ कूदें, नाचें, गुनगुनाएँ,भरें खुशी के रंग।भोले मन की खिलखिली,सबसे प्यारा ढंग॥

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