शब्दों के बीच का मौन
शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं। वे प्रेरित कर सकते हैं, घाव भर सकते हैं, शिक्षा दे सकते हैं, सांत्वना दे
Read Moreशब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं। वे प्रेरित कर सकते हैं, घाव भर सकते हैं, शिक्षा दे सकते हैं, सांत्वना दे
Read Moreभाषा केवल शब्दों की गठरी नहीं होती; वह समय की स्मृति, समाज की संवेदना और पीढ़ियों की साझा सांस होती
Read Moreसमकालीन हिंदी और उर्दू साहित्य के परिदृश्य में देवेन्द्र माँझी एक अत्यंत संवेदनशील, यथार्थवादी और लोक-चेतना से संपृक्त रचनाकार हैं।
Read Moreहिंदी केवल अक्षरों का समुच्चय या व्याकरण के नियमों में बंधी कोई व्यवस्था नहीं है बल्कि यह हमारे भीतर धड़कते
Read Moreराष्ट्रपति के आदेश 1960 में यह कहा गया था कि उचित समय आने पर सर्वोच्च न्यायालय की भाषा अंततः हिंदी
Read Moreप्रसंगवश – 19 सितंबर : निमाड़ी दिवस भाषा तब नहीं मरती जब उसके शब्द चुक जाते हैं; वह तब सूखने
Read Moreहिंदी भारत के जनजीवन में बहती हुई वह सशक्त धारा है, जिसमें इतिहास की स्मृतियां, लोकजीवन की सहजता, साहित्य की
Read Moreविश्व में जितनी संस्थाएं हिंदी की सेवा के लिए बनी हुई हैं, उतनी संस्थाएँ किसी अन्य भाषा के लिए नहीं
Read Moreभारत की “स्व“ भाषा हिंदी के लिए 14 सितंबर का दिन निर्धारित किया गया है क्योंकि इसी दिन भारत की
Read Moreहर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस हमारे संवैधानिक इतिहास, भाषायी विविधता और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा
Read More